ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
राज्य गठन के बाद से एक महिला पेंशन के लिए शिक्षा विभाग के चक्कर काट रही हैं। इस दौरान कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन महिला की पेंशन का मामला नहीं सुलझ पाया। अब मजबूर होकर महिला ने शिक्षक शिकायत प्रकोष्ठ के सामने अपनी समस्या रखी है। साथ ही समस्या का समाधान न होने पर आत्मदाह की चेतावनी भी दी है।
पौड़ी गढ़वाल के बांजखाल, कांसखेत निवासी सरोजनी देवी पिछले कई वर्षों से नेताओं और अधिकारियों के चक्कर काटकर पेंशन बहाल करने की मांग कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति स्व. राजेंद्र प्रसाद कुकरेती राजकीय प्राथमिक विद्यालय रिंगवाडी, पौड़ी में प्रधानाध्यापक थे। 31 दिसंबर 1990 को उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी को तब 30 रुपये पेंशन मिलने लगी। वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य अलग होने के बाद महिला की पेंशन रोक दी गई।
तब से आज तक महिला सभी शिक्षा मंत्रियों, निदेशकों व अन्य अधिकारियों के दर पर फरियाद कर चुकी है। सभी उनकी समस्या के समाधान का आश्वासन देते हैं लेकिन कोई भी हल नहीं निकालता। इसके चलते आज तक उनकी पेंशन बहाल नहीं हो सकी है। उन्होंने शिक्षक शिकायत प्रकोष्ठ ने समस्या रख समाधान की मांग की है। उन्होंने पेंशन बहाल न होने पर आत्मदाह करने की चेतावनी दी है।