पौड़ी। गढ़वाल वन प्रभाग की आरक्षित वन रेंज नागदेव की ऊली एवं पश्चिमी खिर्सू बीट के पास लंबे समय से बंद पड़े भवन के एक कमरे में वन्य जीवों के कई कंकाल मिले हैं। वन विभाग का कहना है कि यह कंकाल बंदर और लंगूर के हैं, कमरे में दम घुटने से इनकी मौत हुई है।
चौबट्टा खिर्सू से हरियालीसैंण तक ट्रैकिंग के दौरान दल में शामिल लोग उल्खागढ़ी मंदिर से फैडखाल की ओर लौट रहे थे। इस बीच नागदेव रेंज की ऊली एवं पश्चिमी खिर्सू बीट से मात्र बीस मीटर की दूरी पर वर्षों से बंद पड़े भवन के एक कमरे को ट्रैकिंग दल में शामिल लोगों ने खोलकर देखा तो उसमें वन्य जीवों के कई कंकाल मिले। इसमें एक कंकाल गुलदार के कंकाल की तरह दिखाई दे रहा था। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आरक्षित वन क्षेत्र में बना यह भवन जल निगम का है, जो पिछले कई वर्षों से बंद पड़ा है। भवन के एक कमरे में कई वन्य जीवों के कंकाल मिलने के बारे में फैडखाल अनुभाग के वन दारोगा सुरेंद्र पोखरियाल ने पहले तो इस तरह की किसी भी जानकारी से इनकार किया, लेकिन जब उन्हें वन्य जीवों के कंकाल की फोटो दिखाई गई तो उन्होंने बताया कि यह कंकाल बंदर एवं लंगूर के हैं। जो कंकाल गुलदार के कंकाल जैसा दिखाई दे रहा है वह भी लंगूर का है। कमरे में बंद होकर दम घुटने से इन वन्य जीवों की मौत हुई है। वन दारोगा ने कहा कि किसी ने भी इनका शिकार नहीं किया है।