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एमबीबीएस और पीजी फीस पर शुल्क निर्धारण समिति लेगी

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एमबीबीएस और पीजी फीस पर शुल्क निर्धारण समिति लेगी फैसला
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सत्र 2015-16, सत्र 2016-17 और सत्र 2017-18 व पीजी के सत्र 2014-15, सत्र 2015-16, सत्र 2016-17 के शुल्क पर अब प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण समिति फैसला लेगी। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से की गई अपील पर अपीलीय प्राधिकरण ने शुल्क निर्धारण समिति को चार सप्ताह में फैसला लेने के निर्देश दिए हैं।
अपीलीय प्राधिकरण के 5 जुलाई 2018 के निर्देशानुसार, शुल्क निर्धारण समिति एमबीबीएस व पीजी की फीस पर फैैसला करेगी। शुल्क निर्धारण समिति ने एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के शुल्क पर आठ अप्रैल 2015 और सात मई 2015 को फैसला सुनाया था, जिसके खिलाफ एसजीआरआर प्रबंधन ने हाईकोर्ट और फिर हाईकोर्ट के आदेश पर अपीलीय प्राधिकरण का दरवाजा खटखटाया था।
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कैसे होगा फैसला
यहां अपीलीय प्राधिकरण के निर्देश और इसके बाद प्रवेश एवं शुल्क नियामक संस्था की ओर से इस पर फैसले की राह भी मुश्किल लग रही है। 16 जून को नैनीताल हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक संस्था के साथ ही अपीलीय प्राधिकरण के अध्यक्ष की भी नियुक्ति निरस्त की जाए। इसके बाद दोनों अध्यक्षों को हटा दिया गया था। अभी तक दोनों ही जगह अध्यक्ष नहीं बन पाए हैं। ऐसे में अब इस मामले पर प्रवेश एवं शुल्क नियामक संस्था कैसे फैसला लेगी, इस पर असमंजस बना हुआ है।

कोट्स :
एमबीबीएस व पीजी कोर्सेज की फ ीस निर्धारण को लेकर एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। उच्च न्यायालय के आदेशानुसार व अपीलीय प्राधिकरण के निर्देशों पर फीस निर्धारण समिति जल्द ही एमबीबीएस व पीजी कोर्सेज के लिए नई फीस तय करेगा, यह फैसला स्वागत योग्य है। अन्य राज्यों में फीस निर्धारण को लेकर स्थिति पहले ही स्पष्ट हो चुकी है। एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने पूर्व में भी यह स्पष्ट किया था कि वर्तमान परिपेक्ष्य में फीस बढ़ना अति आवश्यक है। पुरानी फीस पर एमबीबीएस व पीजी कोर्सेज का संचालन संभव ही नहीं है।
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-भूपेंद्र रतूड़ी, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी

अपीलीय प्राधिकरण ने प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति को निर्देश दिए हैं कि एसजीआरआर के मामले पर नए सिरे से फैसला लिया जाए। यह निर्देश अपीलीय प्राधिकरण के सदस्य की अध्यक्षता में दिए गए हैं। अब यह हाईकोर्ट के आदेश के हिसाब से कितना सही है, इस पर कुछ भी कहना मुश्किल है। हमने अपना काम कर दिया है। अब फैसला प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति को लेना है।
- डॉ. अंजू अग्रवाल, नोडल अधिकारी, अपीलीय प्राधिकरण
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