ब्यूरो/अमर उजाला, मसूरी
‘परिंदों को नहीं दी जाती तालीम उड़ानों की, वे खुद ही तय करते हैं मंजिल आसमानों की’। कुछ इसी जोश और जज्बे के साथ एक वर्ष के कठिन प्रशिक्षण के बाद शुक्रवार को 13 नए सैन्य अफसर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल की मुख्य धारा में शामिल हो गए। इनमें 12 महिला अफसर शामिल हैं। आईटीबीपी अकादमी में आयोजित दीक्षांत एवं शपथ समारोह में सैन्य अधिकारियों ने देश सेवा की शपथ ली। बतौर मुख्य अतिथि आईटीबीपी अकादमी के महानिरीक्षक एवं निदेशक पीएस पापटा ने पासिंग आउट परेड की सलामी ली। साथ ही उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को पुरस्कृत भी किया।
उपनिरीक्षक/जीडी सुमन पंवार को सर्वश्रेष्ठ कैडेट और आंतरिक क्रियाकलापों में प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया। उपनिरीक्षक/जीडी दीपिका देवी को बाह्य प्रशिक्षण क्रियाकलापों प्रथम और सर्वोत्तम निशानेबाज का पुरस्कार मिला। सैन्य अफसरों को संबोधित करते हुए महानिरीक्षक एवं निदेशक आईटीबीपी अकादमी पीएस पापटा ने युवा अफसरों उनके बेहतरीन ड्रिल प्रदर्शन के लिए बधाई दी। साथ ही उनके गौरवशाली भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि सैनिक को अपने जीवन में सैन्य गुण और सद्भाव को आत्मसात करना चाहिए। इस दौरान नए अधीनस्थ अधिकारियों के कंधे पर उनके माता-पिता एवं अभिभावकों ने बैज लगाए। महानिरीक्षक ने कहा कि वे अभिभावक भाग्यशाली हैं, जिनकी संतानें आज आईटीबीपी जैसे बेहतरीन संस्थान में सेवाएं दे रही हैं।
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यूपी के सर्वाधिक सात कैडेट पासआउट
पीओपी में उत्तर प्रदेश से सात, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ से एक-एक अधीनस्थ अधिकारी पासआउट हुए। इस अवसर पर अकादमी के उपनिदेशक ब्रिगेडियर राम निवास, सेनानी परमिंदर सिंह, प्रशिक्षण सेनानी बेनुधर नायक और अकादमी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और नए अधिकारियों के परिजन आदि मौजूद थे।
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जालौन की दीपिका ने सपने को हकीकत में बदला
मसूरी। जिनके सपनों में उड़ान होती है उन्हीं के हौसलों को पंख लगते हैं... यह कहावत यूपी के जालौन स्थित सिकरी राजा गांव के किसान परिवार की बेटी दीपिका पर सटीक बैठती है। उन्होंने अपने जुनून और जज्बे के दम आईटीबीपी में बतौर अफसर शामिल होकर अपने हुनर का लोहा मनवाया है। दीपिका बताती हैं कि बचपन से ही उन्होंने देश सेवा का सपना देखा था। अब आईटीबीपी में शामिल होकर यह सपना पूरा हुआ है। इससे उनका पूरा परिवार बेहद खुश और गौरवान्वित महसूस कर रहा है। पिता राजकुमार सिंह खेती करते हैं। दीपिका दो भाइयों के बीच इकलौती और बड़ी बहन हैं। उनकी प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा जनपद जालौन में हुई। आईटीबीपी अकादमी में पीओपी की कमान उन्होंने ही संभाली।
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सुमन ने बढ़ाया उत्तराखंड का मान
मसूरी। आईटीबीपी अकादमी, मसूरी में कठिन प्रशिक्षण के बाद पासिंग आउट परेड में देश सेवा का शपथ लेने वाली उत्तरकाशी के मोरी ब्लॉक निवासी सुमन पंवार एक भाई के साथ इकलौती बेटी हैं। सुमन के पिता एक प्राइवेट संस्थान में नौकरी करते हैं। शुक्रवार को आईटीबीपी में बतौर अधिकारी शामिल होने पर वह बेहद खुश नजर आईं। उनका कहना है कि महिलाएं किसी क्षेत्र में कम नहीं हैं। दृढ़ निश्चय कर किसी भी चुनौती को पार कर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। सुमन ने यूआईटी, देहरादून से बीटेक किया है। इस पीओपी में पास होने वाली वह उत्तराखंड की इकलौती अफसर हैं।
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खुर्जा की समिया शफीक ने मनाया प्रतिभा का लोहा
मसूरी। आईटीबीपी में बतौर अधीनस्थ अधिकारी के रूप में शामिल समिया शफीक ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। यूपी के बुलंदशहर के खुर्जा निवासी समिया बताती हैं कि माता-पिता ने सेना में जाने के लिए उन्हें प्रेरित किया। समिया अपने परिवार से सेना में भर्ती होने वाली पहली अधिकारी हैं। समिया कहती हैं कि मुस्लिम समाज में भी धीरे-धीरे शिक्षा के प्रति जागरुकता बढ़ रही है। समाज की बेटियां भी अब विभिन्न क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रही हैं। इस खास लमहे की गवाह बनीं समिया की मां इशरत शफीक ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ को सफल बनाने में प्रत्येक समाज के लोगों को अपना योगदान देना चाहिए। समिया बचपन में शिक्षा के लिए बाहर चली गईं। दिल्ली और देहरादून से उन्होंने उच्च स्तरीय शिक्षा हासिल की।