संबद्धता देने से पहले कुलपति करेंगे निरीक्षण
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
सूबे के महाविद्यालयों की विश्वविद्यालयों से संबद्धता अब आसान न होगी। निरीक्षण समिति के सामने जुगाड़बाजी से फैकल्टी जुटाने वाले कॉलेज संचालकों की राह मुश्किल होने वाली है। राजभवन ने संबद्धता के नियमों को सख्त कर दिया है। इसके तहत निरीक्षण समिति की जांच आख्या के आधार पर कुलपति उस कॉलेज का औचक निरीक्षण करेंगे। कुलपति की संस्तुति के बाद ही आगे फाइल बढ़ेगी। अगर कुलपति ने अनुमोदन नहीं दिया तो संबद्धता भी लटक जाएगी।
अभी तक किसी भी कॉलेज को विश्वविद्यालय से संबद्धता लेने के लिए आवेदन करना होता था। उस आवेदन के साथ संबंधित कोर्स की एफडी जमा करानी होती थी। इसके बाद विवि स्तर से विशेषज्ञों की टीम गठित की जाती थी, जिसमें शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े एक्सपर्ट कॉलेज में पहुंचकर निरीक्षण करते थे। निरीक्षण के आधार पर वह कुलपति को रिपोर्ट सौंपते थे। कुलपति के हस्ताक्षर के बाद यह फाइल आगे बढ़ जाती थी।
अब यह नियम बदल गया है। राजभवन के नए निर्देशों के मुताबिक अब कुलपति की जवाबदेही बढ़ गई है। निरीक्षण समिति की जांच आख्या को देखने के बाद कुलपति को अधिकार दिया गया है कि वह अपने स्तर से औचक निरीक्षण कर लें। अगर उनके निरीक्षण में निरीक्षण समिति की आख्या के हिसाब से तथ्य सही नहीं पाए जाते हैं तो कुलपति को अधिकार दे दिया गया है कि वह फाइल को वहीं रोक सकते हैं। इसी प्रकार कुलपति चाहें तो बिना मौके पर जाए भी अनुमोदन दे सकते हैं लेकिन किसी भी गड़बड़ी की जिम्मेदारी भी उनकी ही होगी। इस नियम का फायदा यह भी होगा कि अगर मौके पर कुलपति की जांच में सब सही पाया जाता है तो उनके हस्ताक्षर होते ही फाइल नहीं रुकेगी। जल्द ही कॉलेज को संबद्धता मिल जाएगी।
अब शासन का अड़ंगा भी खत्म
अभी तक संबद्धता के लिए फाइल कई साल तक शासन स्तर पर अटकी रहती थी। उस स्थिति में कई कॉलेज तो ऐसे होते थे, जिनमें दाखिले हो जाते थे लेकिन संबद्धता का पत्र राजभवन से इसलिए जारी नहीं हो पाता था कि शासन ने फाइल आगे नहीं बढ़ाई। इस अड़ंगे को भी शासन ने खत्म कर दिया है। अब सीधे राजभवन को ही फाइल जाएगी।
कोट :
किसी भी कॉलेज को कुलपति की संस्तुति और निरीक्षण के बिना संबद्धता नहीं दी जाएगी। अगर कोई कॉलेज अपने दावों के मुताबिक कहीं भी कमजोर निकलता है तो उसकी फाइल रोक दी जाएगी। जब तक वह सभी मानक पूरे न कर ले तब तक फाइल पर हस्ताक्षर नहीं होंगे। राजभवन से नई व्यवस्था के निर्देश मिल गए हैं, जिसके मुताबिक काम शुरू कर दिया गया है।
- प्रो. एचएस धामी, कुलपति, एचएनबी मेडिकल विवि