ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
एससी, एसटी एक्ट में संशोधन संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में सोमवार को दिल्ली रूट पर बसों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं का असर मंगलवार को भी दिखाई दिया। घटना से भयभीत हजारों यात्रियों ने सफर नहीं किया। इसके चलते बस अड्डों पर सन्नाटा पसरा रहा। इससे रोडवेज को 30 लाख का नुकसान हुआ है।
दिल्ली रूट पर प्रदर्शनकारियों ने उत्तराखंड परिवहन निगम की नौ बसों में तोड़फोड़ करने के साथ तीन बसों को जला दिया था। इसके बाद रोडवेज प्रबंधन ने दिल्ली रूट पर 300 बस सेवा बंद कर दी। मंगलवार को स्थिति सामान्य होने के बाद रोडवेज ने बसों का संचालन शुरू कर दिया, लेकिन लोगों में अराजकता का असर साफ दिखाई दिया। प्रदेश में भर एक दिन में करीब 70 हजार यात्री बस में सफर करते हैं, जबकि मंगलवार को करीब 40 हजार यात्रियों ने ही सफर किया। इससे बस अड्डों पर सन्नाटा रहा। यात्रियों की कमी के चलते बसों का शेड्यूल भी प्रभावित हुआ। कंडक्टर यात्रियों का इंतजार करते रहे, इससे बसें अपने निर्धारित समय से देर से भी चली। रोडवेज को सामान्य दिनों में औसतन एक दिन में 1 करोड़ 60 लाख की आय होती है, लेकिन यात्री कम मिलने से रोडवेज को करीब 30 लाख का नुकसान हुआ है। महाप्रबंधक संचालन दीपक जैन के अनुसार स्थिति सामान्य होने के बाद बसों का संचालन शुरू कर दिया गया था। लोगों में घटनाओं को लेकर डर था, इस लिए वह निकले हैं। उम्मीद है कि एक- दो दिनों में स्थिति ठीक हो जाएगी।
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सतर्कता बरतने का निर्देश
परिवहन निगम ने मंगलवार को दिल्ली रूट पर बस सेवा संचालित कर दी। इससे यात्रियों राहत मिली है। रोडवेज प्रबंधन के अनुसार बस सेवा शुरू करने के साथ ही चालक, परिचालकों को सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है। यात्रियों की सुरक्षा प्राथमिकता है।
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आईएसबीटी में परेशान दिखे यात्री
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दिल्ली जाने के लिए आधे घंटे तक बस का इंतजार करना पड़ा। जबकि पहले दिल्ली के लिए लगातार बसें मिलती थी। हिंसा का असर पड़ा है। - रविंद्र कुमार
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व्यापार के सिलसिले में देहरादून आया था। मुझे कल ही दिल्ली जाना था, लेकिन दिल्ली मार्ग पर हिंसा की जानकारी होने पर जाने का प्लान कैंसिल कर दिया था। - जसविंदर
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मुझे जयपुर जाना था, वहां जाने वाली बसें दिल्ली होते हुए जाती हैं। हिंसा की सूचना के बाद नहीं गया, आज भी जयपुर की सीधी बस पकड़ने में दिक्कतें आ रही है। - संचित शर्मा
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दो दिन में रोडवेज को 1.15 करोड़ का फटका
- पहले ही घाटे में चल रहा है रोडवेज
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। रोडवेज को दो अप्रैल को हुई अराजकता से एक करोड़ पंद्रह लाख का झटका लगा है। अब रोडवेज प्रबंधन नुकसान की भरपाई में जुट गया है।
परिवहन निगम की आर्थिक हालत खराब है। वेतन देने से लेकर बसों के मेंटेनेंस के पार्ट आदि खरीदने में मुश्किल हो रही है। काफी काम उधारी में चल रहा है। इसके अलावा रोडवेज का विभिन्न विभागों में साठ करोड़ फंसा हुआ है। इस राशि को प्राप्त करने के लिए परिवहन निगम कोशिश में लगा है। अब दो अप्रैल को हुई अराजकता से रोडवेज और घाटे में पहुंचा दिया है। बसों को जलाने, तोड़फोड़ से करीब 60 लाख का नुकसान होने का अनुमान है। इसके अलावा बसों का संचालन बंद होने और यात्रियों के कम मिलने से दो दिनों में करीब 55 लाख का नुकसान हुआ है। इसके अलावा रूट से बसों के हटने से प्रतिदिन मिलने वाले राजस्व का भी नुकसान होना तय है। रोडवेज महाप्रबंधक दीपक जैन के अनुसार विभाग का जो भी घाटा है, उसे कम करने का प्रयास किया जा रहा है। जो मौजूदा स्थितियां है, उसके हिसाब से यह काफी बड़ी रकम है। इस संबंध में रिपोर्ट उच्चाधिकारियाें को सौंप दी गई है। जो बसें क्षतिग्रस्त हुई है, उनकी जल्द से जल्द मरम्मत कर रूटों पर संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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बोले नेता, न्यायोचित मांग को लेकर आवाज की बुलंद
देहरादून। एससी/एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध को दलित नेताओं ने न्यायोचित मांग के लिए संघर्ष बताया है। बसपा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी चरण सिंह के अनुसार एससी/एसटी एक्ट में किसी तरह का बदलाव समाज के हित में नहीं होगा। इसमें बदलाव होने से दलित समाज में अत्याचार की घटनाएं बढ़ जायेंगी। बसपा ने इसी के मद्देनजर दलित संगठनों का समर्थन किया था। आगे भी न्यायोचित मांगों को लेकर वह साथ देगी। रही बात अराजकता की तो उसमें दलित संगठन के लोग शामिल नहीं थे। दूसरी पार्टी के लोगों ने अपने लाभ के लिए अराजकता की है। उत्तराखंड एससी/एसटी परिवहन संघ के क्षेत्रीय मंत्री किशनराम के अनुसार संगठनों के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध नहीं है। इसमें केंद्र सरकार की भूमिका से नाराजगी है। केंद्र सरकार ने मामले में उचित तरीके से पैरवी नहीं की। इसके अलावा पुनर्विचार याचिका दाखिल करने में भी देरी की गई है। एससी/एसटी दलित समाज के लिए बेहद जरूरी है। यह न्यायोचित मांग है, जिसके लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज बुलंद की जा रही है।