ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अनूप कुमार गक्खड़ को बुधवार को शासन ने उनके पद से हटा दिया है। उनकी जगह अब अपर सचिव आयुष जीबी ओली को कुलसचिव का चार्ज दिया गया है। शासन ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब विश्वविद्यालय चिकित्साधिकारी भर्ती परीक्षा को लेकर विवादों में है। हालांकि शासन और विवि के कुलपति ने इसे सामान्य प्रक्रिया करार दिया है।
उत्तराखंड आयुर्वेद विवि में चिकित्साधिकारी के 19 पदों पर भर्ती के लिए रविवार को परीक्षा हुई थी। परीक्षा में अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि दस साल पुराने पेपर के सवाल हूबहू रिपीट हो गए थे। विवि ने विवादों के बीच ही अगले दिन प्रोविजनल रिजल्ट और आंसर की जारी कर दी थी। अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा की एसआईटी जांच कराने की मांग की हुई है। मामले में मंगलवार को शासन ने कुलपति से तीन दिन के भीतर पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की थी। रिपोर्ट जाने से ठीक पहले ही बुधवार को अचानक विवि के कुलसचिव प्रो. अनूप कुमार गक्खड़ को हटा दिया गया। उन्हें मूल विभाग में भेजने के साथ अपर सचिव आयुष जीबी ओली को जिम्मेदारी सौंप दी। इसके बाद तेजी से खबर फैली कि परीक्षा में गड़बड़ी के चलते मामले में गाज गिरी है। लेकिन, शासन ने इससे पूरी तरह इनकार किया है। सचिव आयुष हरबंश सिंह के अनुसार प्रो. गक्खड़ आयुर्वेदिक विवि (ऋषिकुल परिसर) के मौलिक सिद्धांत विभाग में कार्यरत हैं, इस विभाग में फैकल्टी की बेहद कमी है। इससे शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहा है, इसके मद्देनजर उन्हें मूल पद पर भेजा गया है। यह फैसला कई दिन पहले हो गया था, लेकिन आर्डर बुधवार को जारी हुआ है। इसका किसी मामले में कार्रवाई से कोई भी संबंध नहीं है। मामले में कुलसचिव प्रो. अनूप कुमार गक्खड़ बताया कि देर शाम तक उन्हें शासन का ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है। अगर ऐसा आदेश आएगा तो उसका अनुपालन किया जाएगा। विवि के कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार ने कहा कि यह सामान्य प्रक्रिया है। इसे चिकित्साधिकारी भर्ती प्रक्रिया से न जोड़ा जाए।
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इसलिए उठ रहे सवाल
आयुर्वेद विवि के ऋषिकुल परिसर से प्रो. अनूप कुमार गक्खड़ ने गत वर्ष जून माह में बतौर कुलसचिव ज्वाइन किया था। तब से लेकर आज तक वह इस जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं। सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि अगर ऋषिकुल में फैकल्टी की इतनी ही कमी थी तो नौ माह तक किस बात का इंतजार किया गया। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब प्रो. अनूप कुलसचिव पद पर रहते हुए भी कक्षा लेने जाते थे तो अचानक उन्हें पूरी तरह से ऋषिकुल क्यों भेजा गया।
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अब असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को लेकर सुगबुगाहट
चिकित्साधिकारी भर्ती परीक्षा में विवाद होने के बाद अब 18 मार्च को होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को लेकर सुगबुगाहट होनी शुरू हो गई है। अभ्यर्थियों को चिंता सता रही है कि कहीं यहां भी कोई इसी तरह की चूक न हो जाए। दरअसल, आयुर्वेद विवि में भर्ती की प्रक्रिया करीब तीन वर्ष से विवादों के चलते अटक-अटक के चल रही है।
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विवि ने शुरू किया मैन्युअल मूल्यांकन
चिकित्साधिकारी भर्ती परीक्षा पर विवाद होने के बाद आयुर्वेद विवि ने अब मैन्युअल मूल्यांकन भी शुरू कर दिया है। विवि के कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार ने कहा कि वैसे तो परीक्षा में पूरी पारदर्शिता बरती गई है, फिर भी सुरक्षा के तौर पर क्रॉस चेक करने के लिए ओएमआर शीटों का मैन्युअल मूल्यांकन भी कराया जा रहा है। दूसरी ओर, विवि में परीक्षा के प्रश्नों को लेकर जो भी आपत्तियां आई हैं, उन्हें निराकरण के लिए विषय विशेषज्ञों के पास भेज दिया गया है।