ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
सरदार भगवान सिंह पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेस एंड रिसर्च, बालावाला में शुक्रवार को आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में 272 रक्तदाताओं ने महादान किया। अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित शिविर में हिमालयन अस्पताल और आईएमए ब्लड बैंक की टीम ने रक्त संग्रह करने के साथ ही युवाओं को सुरक्षित रक्तदान के संबंध में जानकारी भी दी।
शुक्रवार को बालावाला स्थित परिसर में संस्थान के अध्यक्ष एसपी सिंह, प्रबंधकीय सचिव डा. गौरव दीप सिंह और सहायक प्रबंधक (प्रशासन) जोरावर सिंह ने शिविर का शुभारंभ किया। रक्तदाताओं का हौसला बढ़ाते हुए एसपी सिंह ने कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान आज के समय की जरूरत बन चुका है। हर साल हजारों जरूरतमंद खून न मिल पाने के कारण मौत के गाल में समां जाते हैं। इसके अलावा थैलीसीमिया, हीमोफिलिया समेत कई अन्य बीमारियों में लोगों को खून की जरूरत पड़ती है। उनकी यह जरूरत स्वैच्छिक रक्तदान के जरिये ही पूरी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि समाज के सभी लोगों और विशेषकर युवाओं को स्वैच्छिक रक्तदान अपनी आदत में शामिल करना चाहिए।
स्वामी राम हिमालयन विवि - हिमालयन अस्पताल ब्लड बैंक के जनसंपर्क अधिकारी गौरव रावत ने बताया कि 18 से 60 वर्ष आयु का प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति हर तीन माह के अंतराल में सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकता है। निकाले गए तत्वों की पूर्ति शरीर 48 घंटों के भीतर कर लेता है। वहीं, अन्य तत्वों की पूर्ति होने में करीब 90 दिन का समय लगता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित रक्तदान से किसी तरह की कमी नहीं आती और शरीर को नुकसान भी नहीं होता।
आईएमए ब्लड बैंक के जनसंपर्क अधिकारी कमल साहू ने बताया कि नियमित रक्तदान से कई तरह की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। मधुमेह, रक्तचाप, एनीमिया जैसी बीमारियों का शुरूआत में ही पता चल जाता है। उन्होंने बताया कि रक्तदाताओं की कई तरह की जांचें मुफ्त की जाती है, जिससे उनमें किसी भी बीमारी के शुरूआती लक्षण मिलने पर उनकी रोकथाम आसानी से समय रहते की जा सकती है। आयोजन में निदेशक प्रो. एफसी गर्ग, प्रशासनिक अधिकारी कर्नल आईपीएस वालिया, कैप्टन नलिनी महर्षि, कैप्टन रघुवीर, संयोजक डा. विकास आनंद, डा. योगिता डोभाल, डा. नीतू पांडेय, रजनीश सिंह समेत अन्य ने सहयोग दिया।
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कई युवा निकले अनफिट
रक्तदान के लिए पहुंचे कई युवा शुरूआती जांचों में अनफिट होने के चलते खून नहीं दे पाए। विशेषकर युवतियों को वजन व हीमोग्लोबिन कम होने समेत अन्य कारणों के चलते रक्तदान से रोक दिया गया। चिकित्सकों ने उन्हें खान-पान की आदतों में सुधार करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की जानकारी दी।
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रक्तदाताओं को बांटे प्रमाण पत्र
रक्तदान करने वालों को दोनों ब्लड बैंक की ओर से प्रमाण पत्र भी बांटे गए। पहली बार रक्तदान करने वाले युवाओं में खासा उत्साह दिखा। वहीं, कई बार रक्तदान कर चुके रक्तदाताओं ने भी युवाओं को प्रोत्साहित किया। उन्होंने युवाओं से रक्तदान से जुड़े अपने संस्मरण भी साझा किए।