ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
जिले की खराब सड़कों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की न तो लोनिवि को कोई परवाह और न ही एनएचएआई को कोई सरोकार। जिले में चिह्नित 49 ब्लैक स्पॉटों में से लोनिवि 16 जगहों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है। सड़कों पर गड्ढों और ब्लैक स्पॉट के चलते दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। आलम यह है कि मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी के बाद भी संबंधित अफसर संजीदा नहीं हैं।
देहरादून जिले में सड़कों की खस्ता हालत देखते हुए पांच जनवरी 2018 को आरटीओ, पुलिस, प्रशासन, लोनिवि और एनएचएआई की संयुक्त टीमों ने सड़कों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान 49 दुर्घटनाग्रस्त इलाकों को चिह्नित किया गया था। इनमें 22 स्पॉट लोनिवि एवं एनएच विंग की सड़क, 18 स्पॉट लोनिवि और नौ स्पॉट एनएचएआई की सड़कों पर थे। देहरादून शहर के अलावा धामावाला, विकास नगर, शिमला बाईपास, हरिद्वार रोड, सहसपुर, सैलाकुई, नंदा की चौकी क्षेत्र, लांघा रोड और चकराता क्षेत्र में सड़कों गड्ढे और ब्लैक स्पॉट (अंधा मोड़, साइन बोर्ड, रेडियम लाइट, स्ट्रीट लाइट न होना) हैं। इन स्थानों पर अक्सर हादसे होते हैं। डीएम ने लोनिवि और एनएचएआई से चिह्नित दुर्घटनाग्रस्त इलाकों में तत्काल सुधारीकरण कार्य करने के निर्देश दिए थे।
आरटीओ सुधांशु गर्ग के मुताबिक निरीक्षण के 20 दिन बाद भी लोनिवि 16 जगहों पर कार्य नहीं कर पाया है। एनएचएआई ने अभी तक रिपोर्ट ही नहीं दी है। आरटीओ के मुताबिक यातायात नियमों के प्रति वाहन चालकों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन सड़कों की हालत खराब होने से दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन और शासन को भेजी गई है।
साल भर में बढ़ीं 19 फीसदी दुर्घटनाएं
देहरादून जिले में एक जनवरी से दिसंबर 2017 तक 313 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जो कि 2016 में 262 थीं। दुर्घटनाओं का प्रतिशत 19.47 फीसदी बढ़ने से पूरे साल में सड़क हादसों में 128 लोगों ने दम तोड़ा जबकि 235 लोग घायल हुए।