ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
जौलीग्रांट में एयरपोर्ट के पास प्रदेश की गौरवशाली संस्कृति से जुड़ी पारंपरिक वस्तुओं, वाद्य यंत्राें, वेशभूषा और लोक कलाकृतियों की झलक देखने को मिलेगी। यहां जयपुर के चोखी धानी की तर्ज पर संस्कृति ग्राम विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए संस्कृति निदेशालय की ओर से शासन को पत्र लिखकर दस से 15 एकड़ भूमि की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पिछले वर्ष 15 अगस्त को प्रदेश में एक संस्कृति ग्राम बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद संस्कृति विभाग ने संस्कृति ग्राम के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। संस्कृति विभाग की निदेशक बीना भट्ट ने कहा कि प्रदेश में एक ऐसा संस्कृति ग्राम विकसित करने के निर्देश मिले हैं, जिसमें संस्कृति के सभी आयामों के दर्शन हों। इसके लिए संस्कृति विभाग के सचिव को पत्र लिखकर कहा गया है कि शासन मामले में जिला प्रशासन को निर्देशित कर जौलीग्रांट में एयरपोर्ट के पास भूमि तलाशकर विभाग को आवंटित कराएं। निदेशक ने बताया कि इसके लिए दस से 15 एकड़ भूमि मांगी गई है।
उन्होंने बताया कि संस्कृति गांव में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, खान पान, वेशभूषा, रहन-सहन आदि देखने को मिलेगा। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, जागेश्वर, बागेश्वर और कैलाश आदि की अनुकृतियां होंगी। हस्तशिल्प, काष्ठ शिल्प से बनी वस्तुओं का प्रदर्शन और प्रदेश में पैदा होने वाली दुर्लभ जुड़ी-बूटियां भी देखने को मिलेंगी। जयपुर के चोखी धानी की तर्ज पर संस्कृति गांव को विकसित किया जाएगा। इससे पर्यटकों को प्रदेश की गौरवशाली संस्कृति के दर्शन एक ही स्थान पर होंगे। जौलीग्रांट एयरपोर्ट के पास इस गांव का निर्माण इसलिए किया जा रहा है, ताकि पर्यटक यहां आसानी से पहुंच सकें।