तकनीकी क्षेत्र में आगे आ रहीं महिलाएं
देहरादून/अमर उजाला ब्यूरो
चाहे वह चिकित्सा के क्षेत्र में तकनीकी का इस्तेमाल हो या किसी अन्य क्षेत्र में। हर क्षेत्र में महिलाएं भी तेजी से आगे आ रही हैं। आईआईटी जैसे संस्थान भी महिलाओं को तवज्जो दे रहे हैं। ये बातें उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) में सोमवार से शुरू हुए दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने कहीं। सम्मेलन में देश-विदेश से पहुंची तकनीक की छात्राओं ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। पहले दिन 40 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन में इसमें जापान, दक्षिण अफ्र ीका, कोरिया, नेपाल, मलेशिया, सिंगापुर, ईरान, बांग्लादेश, चीन, इंडोनेशिया सहित दस देशों विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
तकनीकी विवि, महिला प्रौद्योगिकी संस्थान (डब्ल्यूआईटी), आईईईई यूपी और आईईईई बांग्लादेश की ओर से दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ सोमवार को यूटीयू कुलपति डॉ. उदय सिंह रावत और पंडित मदन मोहन मालवीय विवि के कुलपति डॉ. एसएन सिंह ने दीप जलाकर किया। इसके बाद डब्ल्यूआईटी की निदेशक डॉ. अलकनंदा अशोक ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सम्मेलन महिलाओं के सशक्तिकरण और तकनीकी शिक्षा में उनके अहम योगदान पर आधारित है। इसलिए शोध प्रस्तुत करने वालों में कम से कम एक शोधार्थी महिला होनी चाहिए। यूटीयू कुलपति डॉ. उदय सिंह रावत ने कहा कि महिलाओं का तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ना एक नए बदलाव का संकेत है। अब आईआईटी जैसे संस्थान महिलाओं को तवज्जो दे रहे हैं। निश्चित तौर पर इसके सार्थक परिणाम जल्द ही सामने आएंगे। कुलपति ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों व प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनजर सड़कों का निर्माण उच्च तकनीकी से हो। ताकि पहाड़ की सड़कों पर दुर्घटना कम से कम हो। सम्मेलन में यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने विज्ञान में हो रहे विकास और नई तकनीक पर प्रकाश डाला। पंडित मदन मोहन मालवीय तकनीकी विवि के कुलपति डॉ. एसएन सिंह ने नए शोधों को उपयोगपरक बनाने पर जोर दिया। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रो. जे राम कुमार और बांग्लादेश से आई डॉ. सेलिना ने शोध को जरूरतों के आधार पर आगे बढ़ाने पर जोर दिया। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दस से अधिक देशों के विषय विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा 150 से ज्यादा शोधार्थियों ने शोध पत्र भेजे हैं, जिनमें से 70 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। सत्रांत पर सम्मेलन की स्मारिका का भी विमोचन किया गया। इस मौके पर आईआईटी कानपुर के डॉ. जे रामकुमार, टीएचडीसी के निदेशक जीएस तोमर, यूटीयू के कुलसचिव डॉ. अनिता रावत, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता, बांग्लादेश के डॉ. सीलिया शहनाज, परीक्षा नियंत्रक कुंवर वैंसला, आशीष बगवाड़ी आदि मौजूद रहे।
हाथ कटने पर अब प्लास्टिक का हाथ भी करेगा पूरा काम
देहरादून/अमर उजाला ब्यूरो
दिव्यांगों के लिए अब ऐसा हाथ तैयार हो गया है जो कि सामान्य जरूरत के सभी काम करेगा। इस हाथ से दिव्यांग बाल्टी भी उठा सकेंगे और कोई वस्तु भी पकड़ सकेंगे। यूटीयू में चल रही अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में पहुंची बांग्लादेश की छात्रा आद्दिका इकबाल ने यह शोध प्रस्तुत किया। इकबाल ने बताया कि वह इस डिवाइस का प्रयोग भी कई लोगों पर कर चुकी हैं।
आद्दिका इकबाल ने बताया कि आमतौर पर हाथ कट जाने के बाद प्लास्टिक या अन्य मैटल का बना हाथ लगाया जाता है। इस हाथ से व्यक्ति कोई काम नहीं कर सकता है। आद्दिका ने बताया कि इसी जरूरत को समझते हुए एक डिवाइसनुमा हाथ तैयार किया है। यह हाथ वेवलेट डिकंपोजिशन और कॉफिशिएंट वेक्टर रिकंस्ट्रक्शन तकनीक पर काम करता है। इस डिवाइस को लगाने के बाद व्यक्ति इससे कोई भी चीज पकड़ सकता है और पानी की बाल्टी भी उठा सकता है। वह इस डिवाइस का दो पुरुष और दो महिलाओं पर सफल प्रयोग कर चुकी हैं। यह बाजार में उपलब्ध अन्य डिवाइस के मुकाबले सबसे कारगर है। सम्मेलन के दौरान आद्दिका इकबाल के इस शोध को काफी वाहवाही मिली।