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पौराणिक धर्मशालाओं पर खतरा

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अमरउ जाला ब्यूरो
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हरिद्वार।
धर्मनगरी में पौराणिक धर्मशालाओं को ध्वस्त करके होटलों और कांप्लेक्सों में तब्दील करने की माफिया के कदमों पर रोक नहीं लग पा रही है। प्रशासन की अनदेखी और भूमि कारोबारियों को मिल रहे राजनीतिक संरक्षण के कारण यह गोरखधंधा लगातार फलफूल रहा है। पिछले एक दशक में कई धर्मशालाएं नेस्तनाबूद कर दी गई हैं।
पिछले सप्ताह सेठ काशीराम पोद्दार धर्मशाला को खरीद-फरोख्त होने के बाद नेस्तनाबूद कर दिया गया है। अब यहां आलीशान होटल बनाने की तैयारी चल रही है। इसी के साथ ही विष्णुघाट, रेलवे रोड, हरकी पैड़ी के पास, श्रवणनाथ नगर और उत्तरी हरिद्वार की कई अन्य धर्मशालाओं के अस्तित्व पर भी संकट के बादल छाए हुए हैं। रेलवे रोड स्थित दो धर्मशालाओं को भी नेस्तनाबूद करने की तैयारी कर ली गई है। इनका विवाद पुलिस तक भी पहुंचा, लेकिन अभी तक निपटारा नहीं हुआ।
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बेशकीमती और हरिद्वार के पौराणिक स्वरूप की पहचान मानी जाने वाली इन धर्मशालाओं को बचाने के लिए ऐसी संस्थाएं भी आगे नहीं आ रही हैं जिनके पदाधिकारी धर्मशालाओं के संरक्षण का दम भरते हैं। यही कारण रहा कि सरेआम जमींदोज की जा रही धर्मशाला को बचाने के लिए किसी भी संगठन ने आवाज नहीं उठाई। इस बारे में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लाजिमी हैं। आखिर बिना विधिक अनुमति के इन धर्मशालाओं की खरीद-फरोख्त हो कैसे रही है। प्रशासन ऐसे लोगों पर शिकंजा आखिर क्यों नहीं कस रहा है। राष्ट्रीय धर्मशाला सुरक्षा समिति के अध्यक्ष महेश गौड़ ने अब शासन-प्रशासन को पत्र भेजकर धर्मशालाओं का संरक्षण करने की मांग उठाई है। महेश गौड़ का कहना है कि पुराने समय से धर्मशालाएं ही तीर्थनगरी की पहचान रही हैं। प्रशासन को इन्हें खुर्द-बुर्द होने से बचाना चाहिए।
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अधिवक्ता हाईकोर्ट जाने की तैयारी में
हरिद्वार। धर्मशालाओं को खुर्दबुर्द कर आलीशान होटलों में तब्दील करने के मामले में अब अधिवक्ता बलराम शर्मा ने सभी धर्मशालाओं की खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया को निरस्त कर उन पर रिसीवर बैठाने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों, कारोबारियों और नेताओं के कोकस के चलते जिस तरह से धर्मशालाओं के अस्तित्व पर संकट आ गया है वह दुर्भाग्यपूर्ण है। धर्मशालाओं को बचाने और खुर्द-बुर्द की गई उनकी संपत्तियों को बचाने के लिए वे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे।
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