राजधानी से करीब 15 किलोमीटर दूरी पर 95 बीघा में फैले आम के बाग पर जमकर आरियां चलाई जा रही हैं।
हरे भरे बाग में व्यापक पेड़ कटान से स्थानीय लोगों में रोष है। उनका कहना है कि यह आम का आग न केवल यहां की पहचान है बल्कि हरियाली का भी प्रतीक है। अगर एक साथ इतने पेड़ काट दिए जाएंगे तो इससे पर्यावरण को भारी नुकसान होगा।
मांडूवाला में देवभूमि संस्थान के गेट के सामने 95 बीघा आम का बाग है। इस बाग के मालिक बलस्वरूप पंत, सुचित पंत, ज्ञान स्वरूप पंत, चंद्र स्वरूप पंत, हरस्वरूप पंत, सुभाष पंत, दिनेश पंत, सुनील पंत, आशीष पंत और आलोक पंत हैं। बीते दस दिनों से यहां सुबह सात बजे से हरे पेड़ों पर आरियां चलनी शुरू हो जाती हैं।
पहले तो पांच या सात पेड़ काटे गए लेकिन अब इनकी संख्या 60 से ऊपर पहुंच चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बाग काटकर यहां कोई निर्माण कार्य करने की योजना है। इन हरे आम के पेड़ों से हर साल करीब 15 से 20 लाख रुपये की फसल होती है। ऐसे हालात में फलदार वृक्ष काटने की परमीशन देने वाला विभाग भी सवालों के घेरे में है।
हरे आम के पेड़ों को काटकर ट्रकों में भरकर यहां से बाहर भेजा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह बाग इस गांव की पहचान है। यहां आम के काफी पुराने पेड़ हैं। बाग में आम के 293 पेड़ हैं। अगर पेड़ काट दिए गए तो न केवल हरियाली छिन जाएगी बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान होगा। पेड़ काटने से हर साल होने वाले फलों का भी नुकसान उठाना पड़ेगा।
यह हो सकती है कार्रवाई
उद्यान विभाग के मुताबिक अनुमति से ऊपर पेड़ काटने पर मालिक को नोटिस जारी किया जाता है। इसके बाद उन पर जुर्माना लगाया जाता है। जुर्माने के तहत गलत पेड़ काटने पर उसके बदल दो या चार पेड़ लगाने का आदेश दिया जाता है। इन पेड़ों को लगाने का काम उद्यान विभाग की देखरेख में किया जाता है।
वन और उद्यान विभाग देता है परमीशन
फलदार वृक्षों को काटने की परमीशन उद्यान विभाग और इससे अलग पेड़ों को काटने की अनुमति वन विभाग देता है। चिंताजनक बात यह है कि उद्यान विभाग को सरकार ने पेड़ खराब होने, उनके फल न देने के आधार पर असीमित पेड़ काटने की अनुमति का अधिकार दिया हुआ है।
इसकी आड़ में ही राजधानी और आसपास के आम व लीचियों के बागों पर लगातार आरियां चलाई जा रही हैं। वन विभाग में भी पेड़ काटने के लिए अनुमति दी जाती है। लेकिन बिना अनुमति पेड़ काटने पर वन विभाग के मूल्यांकन के हिसाब से एक हजार से लेकर लाखों रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यह मूल्यांकन विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर करते हैं।
हमने इस बाग में उन आठ आम के पेड़ों का काटने की अनुमति दी थी, जो कि सूख चुके हैं। अगर इससे ज्यादा पेड़ काटे जा रहे हैं तो यह मामला गंभीर है। इसकी जांच की जाएगी और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- संजय श्रीवास्तव, जिला उद्यान अधिकारी
आम के पेड़ की अनुमति वन विभाग ने नहीं दी है। यह मामला उद्यान विभाग का है। लिहाजा, इसमें कार्रवाई की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।
- पीके पात्रो, प्रभागीय वन अधिकारी, देहरादून
यह बाग हमारा है। बाग के सभी पेड़ हमने एक ठेकेदार को बेच दिए हैं। अब ठेकेदार इन पेड़ों को कटवाने के लिए परमीशन लाया है या नहीं, यह वही जानता है। हम इस बारे में कुछ नहीं कर सकते। (एक घंटे बाद फिर फोन आया तो उनके शब्द बदले थे) बाग के बारे में मैं ज्यादा नहीं जानता हूं। चाचा जी ही बाग की देखभाल करते हैं, वही इस बारे में कुछ बता पाएंगे।
- सुचित पंत, बाग के मालिक