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देहरादून: पीएम मोदी के कार्यक्रम में जा रहे विपक्षी दलों के नेताओं को पुलिस ने रोका, 55 लोग गिरफ्तार

Thu, 21 Jun 2018 11:41 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य समारोह में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन देने जा रहे विपक्षी दलों और संगठनों 55 नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बाद में सभी को निजी मुचलकों पर छोड़ भी दिया। प्रदर्शनकारी वन अधिकार बहाली की छह सूत्रीय मांग को लेकर गांधी पार्क से योग स्थल की ओर जाने की कोशिश कर रहे थे।

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प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के नेतृत्व में कांग्रेस, माकपा और सपा समेत कई संगठनों के नेता व कार्यकर्ता सुबह करीब छह बजे गांधी पार्क में एकत्रित हुए। पार्क में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के बाद जुलूस की शक्ल में सभी कार्यकर्ता मुख्य मार्ग पर पहुंचे। वहां पहले से ही पुलिस और प्रशासन के लोग मौजूद थे। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी के मुताबिक, नारेबाजी करते हुए जैसे ही वे वन अनुसंधान संस्थान की ओर रवाना हुए, 55 प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उन्हें पुलिस लाइन ले जाया गया।

कुछ देर हिरासत में रखने के बाद निजी मुचलकों पर सभी को रिहा कर दिया गया। गिरफ्तारी देने वालों में किशोर उपाध्याय, जोत सिंह बिष्ट, भाकपा के प्रदेश सचिव समर भंडारी, सपा के अध्यक्ष प्रो. एसएस सचान, राज्य आंदोलनकारी जयप्रकाश उत्तराखंडी, कांग्रेस के महामंत्री नवीन जोशी, डॉ. आरपी रतूड़ी, राजीव जैन, अमर जीत सिंह, सारिका प्रधान, याकूब सिद्दीकी, सुशील राठी, नरेंद्र रमोला, शांति रावत, कमलेश रमन, दिनेश व्यास, राजेंद्र धवन, पुराण सिंह रावत, राजेश चमोली, विशाल मौर्य, प्रेम बहुखंडी, शंकर गोपाल, जय नारायण नौटियाल समेत कई अन्य कार्यकर्ता थे।  

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छह सूत्रीय मांग पत्र

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पीएम के पास दो मिनट भी नहीं
प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने वन अधिकारों की मांग को लेकर प्रधानमंत्री से समय मांगा था, लेकिन उनके पास जनता से मिलने और उनकी समस्या सुनने के लिए दो मिनट का भी समय नहीं है। उन्होंने कहा कि मोदी की इस योग यात्रा से आम जनता को कोई लाभ नहीं हुआ। इस तमाशे पर करोड़ों रुपये और शासन का कीमती समय बर्बाद किया गया।

छह सूत्रीय मांग पत्र
-वन अधिकार अधिनियम 2006 यथाशीघ्र लागू किया जाए। उत्तराखंड के मूल निवासियों को वनवासी का दर्जा दिया जाए।
-वन एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रति परिवार प्रतिमाह एक गैस सिलेंडर तथा 100 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाए।
-राज्य के बेरोजगारों को सरकारी केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण दिया जाए।
-हिमालयी क्षेत्र में पैदा होने वाली जड़ी-बूटी के दोहन का अधिकार पत्र स्थानीय समुदायों को मिले।
-हर परिवार को आवासीय भवन के निर्माण के लिए लकड़ी, पत्थर, रेत, बजरी व मिट्टी निशुल्क उपलब्ध कराई जाए।
-उत्तराखंड को ग्रीन बोनस के रूप में हर साल 10 हजार करोड़ रुपये दिए जाएं।
-तिलाड़ी आंदोलन के शहीदों के सम्मान को 30 मई को वन अधिकार दिवस घोषित हो।
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