परिवहन निगम के 25 फोरमैन को वित्तीय झटका
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। उत्तराखंड परिवहन निगम में कई साल से शासनादेशों के विपरीत मोटी तनख्वाह ले रहे 25 फोरमैन को अब वित्तीय झटका लगा है। महाप्रबंधक दीपक ने आदेश जारी कर इन सभी फोरमैन को 6600 रुपये की जगह 5400 रुपये ग्र्रेड पे और 5400 ग्रेड पे ले रहे फोरमैन को 4200 रुपये ग्रेड पे देने का आदेश जारी किया है। चौंकाने वाली बात है कि इन सभी फोरमैन को कई साल से शासनादेश के विपरीत एसीपी का लाभ दिया जा था। इसकी महाप्रबंधक समेत किसी भी अधिकारी ने कोई सुध नहीं ली। ऐसे में अतिरिक्त वेतन भुगतान करने से परिवहन निगम को करोड़ों की चपत तो लगी ही है, साथ ही विभागीय अफसरों की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विभागीय अफसरों के मुताबिक जिन फोरमैनों की एसीपी को घटाकर वेतन में औसतन 25000 रुपये की कमी की गई है, उसमें सीनियर फोरमैन राकेश कुमार, जेके पाठक, सतीश कुमार, मोहम्मद कमर, सुरेंद्र सिंह रावत, पंकज ऐरन, ललित मोहन नौगाई, मोहनचंद्र तिवारी, सुखवीर सिंह, राजेंद्र सिंह, सतीश कुमार, नरेंद्र कुमार, रमेशचंद्र पांडे, अनिल कुमार, पीके गुप्ता व रक्षपाल सिंह, रवींद्र्र गर्ग, सुरेंद्र सिंह, ओमप्रकाश, बालकिशन, ईसम सिंह, कलीम अहमद, राजेंद्र सिंह बिष्ट, महेंद्र कुमार, श्रीपाल जैसे फोरमैन शामिल हैं।
चौंकाने वाली बात है कि शासन की ओर से एसीपी को लेकर संशोधित शासनादेश जारी होने के बावजूद इन सभी फोरमैनों को नियमों के विपरीत एसीपी का लाभ दिया गया। मामला उस समय संज्ञान में आया जब महाप्रबंधक कार्मिक निधि यादव ने दस्तावेजों की जांच कराई। आखिरकार बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता उजागर होने के बाद उन्होंने प्रकरण से वित्त नियंत्रक को अवगत कराते हुए कार्रवाई की बात कही। वित्त नियंत्रक पंकज तिवारी ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए महाप्रबंधक को अवगत कराया था। आखिरकार तमाम पहलुओं पर विचार विमर्श करने के बाद महाप्रबंधक दीपक जैन ने सभी फोरमैन की दी जा रही एसीपी में संशोधन करते हुए आदेश जारी कर दिया। महाप्रबंधक के आदेश के बाद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति है।
आखिर किसने गायब किया संशोधित शासनादेश?
सवाल उठता है कि जब एसीपी को लेकर शासन ने संशोधित शासनादेश जारी कर दिया और वह सभी विभागों में पहुंच गया। सभी विभागों ने इस पर कार्रवाई भी कर दी। ऐसे में परिवहन निगम में शासनादेश क्यों नही पहुंचा। आखिरकार शासनादेश किसने गायब किया? यदि शासनादेश आया था तो इसे लागू क्यों नहीं किया गया? इसे लेकर विभागीय अफसरों और कर्मचारियाें की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
कोट...
फोरमैनोें को संशोधित शासनादेश के अनुसार एसीपी का लाभ देने का आदेश जारी कर दिया गया है। सभी फोरमैन निर्धारित प्रावधानोें के विपरीत वेतन ले रहे थे। इनमें जो भी अधिकारी और कर्मचारी शासनादेशाें के विपरीत वेतनमान ले रहे हैं उनका भी संशोधन किया जाएगा।
- दीपक जैन, महाप्रबंधक