ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए एक तरफ सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। दूसरी ओर राज्य में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए मात्र दो जिलों में ही आईसीयू (इंसेंटिव केयर यूनिट) वार्ड स्थापित किए गए हैं। राज्य की सवा करोड़ की आबादी के लिए आईसीयू में मात्र दस बेड की व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली बयां करने में अपने आप में काफी है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में मात्र देहरादून और पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में आईसीयू संचालित हैं। दोनों जिला अस्पतालों में आईसीयू वार्ड में मात्र पांच-पांच बेड की व्यवस्था है। जबकि आईसीयू की जरूरत हर जिला अस्पताल में रहती है। इसके लिए प्रत्येक सीएमओ की ओर से अपने-अपने अस्पतालों में आईसीयू स्थापित करने के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय को कई बार पत्राचार भी किया, लेकिन मांग धरातल पर नहीं उतरी। मजबूरन गंभीर मरीजों को सरकारी अस्पतालों से आईसीयू न होने से निजी अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है।
कैसे होगा संचालन जब विशेषज्ञ डॉक्टर, पैरामेडिकल नहीं
स्वास्थ्य महानिदेशक राज्य के सभी जिलों में आईसीयू खोलने के दावे तो कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अस्पतालों में आईसीयू खोलने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टराें व पैरा मेडिकल की जरूरत होगी। पहले से डॉक्टराें व पैरा मेडिकल की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग के लिए यह आसान नहीं होगा। ज्ञात हो कि पिछले दिनों हाईकोर्ट ने सरकारी अस्पतालोें में डॉक्टरों व पैरा मेडिकल की कमी को लेकर स्वास्थ्य विभाग को चेतावनी जारी की थी।
सभी जिलों में आईसीयू खोलने की प्रक्रिया जारी है। हंस फाउंडेशन के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आईसीयू स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। जल्द जिलों में इंटेंसिव केयर यूनिट की स्थापना की जाएगी।
..डॉ. टीसी पंत, स्वास्थ्य महानिदेशक