ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
उत्तराखंड परिवहन निगम जहां एक तरफ वित्तीय संकट से जूझ रहा है वहीं विभागीय अधिकारी बेटिकट यात्रियों की धरपकड़ व चालकों-परिचालकों की शिथिलता को जांचने के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। समीक्षा में इस बात का खुलासा होने पर महाप्रबंधक प्रशासन ने सात यातायात निरीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मंडलीय प्रबंधक व सहायक महाप्रबंधकों को पत्र लिखकर कड़ी चेतावनी दी गई है।
परिवहन निगम के आंकड़ों पर नजर डालें तो निगम प्रवर्तन निरीक्षक सुरेंद्र साहनी ने जून माह में महज तीन, सुनील गुप्ता ने अप्रैल व मई में महज एक-एक, प्रवर्तन निरीक्षक जितेंद्र कुमार ने मार्च, अप्रैल व जून में सिर्फ तीन, प्रदीप काला ने जनवरी व फरवरी में महज एक-एक, मार्च में तीन, अप्रैल में चार व जून में एक भी गाड़ी की जांच नहीं की। प्रवर्तन निरीक्षक आनंद कुमार शर्मा ने जून में एक भी जांच नहीं की। मार्च में तीन व अप्रैल में चार वाहनों की जांच की। प्रवर्तन निरीक्षक सहेंद्र पाल ने सिर्फ मार्च माह में एक वाहन की जंाच की। समीक्षा के बाद इन प्रवर्तन निरीक्षकों की स्थिति बेहद खराब पाए जाने के बाद महाप्रबंधक (प्रशासन) निधि यादव ने मंडलीय प्रबंधक व सहायक महाप्रबंधकों को निर्देशित किया कि वे अपने स्तर पर इन सभी प्रवर्तन निरीक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करें। महाप्रबंधक निधि यादव का कहना है कि यदि अधिकारियों के स्तर पर भी शिथिलता बरती गई तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।