ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
प्रदेश में होने वाले छात्रसंघ चुनावों से पहले ही सरकार इससे जुड़े नियमों में बदलाव लागू करेगी। इसके लिए उत्तराखंड आवासीय विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी। यह समिति 16 जुलाई को तकनीकी विवि में अंतिम बैठक करने के बाद सरकार को रिपोर्ट सौंप देगी। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि बदलाव इसी साल से लागू किए जाएंगे।
प्रदेशभर में नए सत्र के आगाज के साथ ही छात्रसंघ चुनावों की गर्माहट भी तेज हो गई है। इस बीच सरकार इसी साल से छात्रसंघ चुनावों के लिए लागू लिंगदोह समिति की सिफारिशों में बदलाव करने की तैयारी में है। इसके लिए प्रो. एचएस धामी की अध्यक्षता में गठित समिति पहले ही प्रदेशभर के छात्रसंघ पदाधिकारियों से वार्ता कर चुकी है। इस समिति में श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डॉ. यूएस रावत और कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल भी शामिल हैं। प्रो. धामी ने बताया कि बदलावों के तहत सिफारिशों को 16 जुलाई को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके लिए तकनीकी विवि में बैठक बुलाई गई है। बैठक में समिति के सभी सदस्य और गढ़वाल और कुमाऊं के छात्र महासंघ पदाधिकारी शामिल होंगे। जो भी बदलाव की सिफारिशें हैं, उन पर सभी की सहमति से अंतिम मुहर लगेगी। इसके बाद रिपोर्ट उसी दिन सरकार को सौंप दी जाएगी। उधर, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों में परिवर्तन सहित छात्रसंघ चुनावों को लेकर सभी बदलाव इसी सत्र से लागू किए जाएंगे।
ये हो सकते हैं बदलाव
-छात्रसंघ चुनाव में एक पदाधिकारी के खर्च की सीमा 5,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये हो सकती है। खर्च पर एक स्वतंत्र पर्यवेक्षक नजर रखेगा। उल्लंघन करने पर प्रत्याशी का नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।
-अब शपथ-पत्र के आधार पर नहीं बल्कि गत वर्ष और इस वर्ष की 75 प्रतिशत उपस्थिति के आधार पर ही नामांकन का मौका मिलेगा। छात्रसंघ चुनाव के प्रत्याशी की उपस्थिति सत्यापित की जाएगी।
-पूरे प्रदेश में छात्र महासंघ चुनाव में अब एक ही नियम चलेगा। जो छात्र नेता विवि प्रतिनिधि के चुनाव जीतेंगे, केवल वही छात्र महासंघ में चुनाव लड़ सकेंगे। अभी तक गढ़वाल विवि में यह नियम चलता है जबकि कुमाऊं विवि में कोई भी महासंघ का चुनाव लड़ सकता है।
-प्रत्याशियों और उनके समर्थकों को महाविद्यालय या विवि परिसर से बाहर जुलूस निकालने या जनसभा करने या किसी भी तरह का प्रचार करने की अनुमति नहीं होगी। कोई भी प्रत्याशी प्रचार के लिए लाउडस्पीकर वाहन और जानवरों का प्रयोग नहीं कर सकेगा।
-कॉलेज या विवि की किसी भी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर संबंधित प्रत्याशी या सभी प्रत्याशी जिम्मेदार माने जाएंगे। इस बदलाव के बाद छात्र नेता अब कॉलेज की दीवारों का इस्तेमाल प्रचार सामग्री के लिए नहीं कर सकेंगे।
-प्रत्येक महाविद्यालय या विवि में छात्रसंघ चुनाव के दौरान जिला प्रशासन के स्तर से निष्पक्ष पर्यवेक्षक अनिवार्य रूप से तैनात किए जाएंगे। यह नामांकन से लेकर चुनाव परिणाम तक पर नजर रखेंगे। इन्हें कोई गड़बड़ी होने पर चुनाव प्रक्रिया निरस्त करने का अधिकार होगा।
-छात्रसंघ से चुने गए पदाधिकारी संबंधित विवि की अकादमिक परिषद या कॉलेजों की एग्जीक्यूटिव कमेटी में नामित होंगे।
-छात्रसंघ व महासंघ में छह-छह पद नामांकन के आधार पर भरे जाएंगे। इसमें दो छात्र विवि स्तर के टॉपर, दो छात्र खेलकूद के श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले और दो छात्र सांस्कृतिक कार्यकलापों में नाम रोशन करने वाले होंगे।