ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
जनता मिलन कार्यक्रम में बृहस्पतिवार को जो कुछ हुआ, उसके लिए सरकारी सिस्टम भी कम जिम्मेदार नहीं है। 20 वर्ष दुर्गम में सेवा देने और 2015 में पति की मौत के बाद तबादले के लिए चक्कर काट रही शिक्षिका उत्तरा पंत ने जो किया, उसे बड़े पैमाने पर शिक्षकों का समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर उत्तरा के समर्थन में शिक्षक लिख रहे हैं कि अगर सिस्टम ने उनकी सुनी होती तो शायद ऐसा होता ही नहीं।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के जनता मिलन कार्यक्रम में हंगामा करने वाली उत्तरा पंत पिछले करीब तीन वर्षों से तबादलों के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं। उत्तरा की मानें तो वर्ष 2015 में पति की मौत के बाद से वह लगातार अधिकारियों से फरियाद लगा रही हैं। हर स्तर पर उन्होंने अपील की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। कुछ दिन पहले भी उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। प्रकरण के बाद से सोशल मीडिया पर शिक्षक उनके पक्ष में खड़े हो गए हैं। शिक्षकों ने पंत के व्यवहार को गलत ठहराया, लेकिन सीएम का भी समर्थन नहीं किया। फेसबुक पर शिक्षकों ने लिखा कि यह सड़-गल चुके सिस्टम की नाकामी का यह सबसे बड़ा उदाहरण है।
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विशेष छूट का प्रावधान
प्रदेश में बनाए गए तबादला एक्ट में दुर्गम की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों के लिए विशेष छूट का प्रावधान है। उन्हें अनुरोध के आधार पर दुर्गम से सुगम में तबादले का लाभ दिया जा सकता है। इसके अलावा विधवाओं को भी इसमें प्राथमिकता दी जाती है। 55 वर्ष से अधिक आयु की महिला कर्मियों को भी तबादलों में छूट का लाभ दिया जाता है।
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फेसबुक पर खासी सक्रिय
उत्तरा पंत फेसबुक पर भी खासी सक्रिय हैं। बुधवार तक उन्होंने लगातार बड़ी संख्या में पोस्ट किए हैं। इनमें से कुछ में उन्होंने सत्ता और हुक्मरानों पर निशाना साधा है। कुछ पोस्ट में पारिवारिक लोगों और अधिकारियों को निशाना बनाया है।