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चरित्र निर्माण में बचपन की शिक्षा अहम

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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चरित्र निर्माण में बचपन की शिक्षा अहम होती है। अगर बच्चों के भीतर बचपन से ही अहिंसा, प्रेम और त्याग की भावना जगाई जाए तो बेहतर समाज का निर्माण हो सकता है। आज संस्कारों की कमी के चलते समाज की सोच नकारात्मक बनती जा रही है। यह बातें राजपुर रोड स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय पहुंचे महात्मा गांधी के पौत्र प्रोफेसर राजमोहन गांधी ने कहीं।
वह बृहस्पतिवार को स्कूल में बच्चों से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान बच्चों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया। बच्चों को देख प्रो. गांधी काफी खुश नजर आए। इस दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। गांधी जी पर आधारित मूक नाटक को खूब सराहना मिली। कार्यक्रम के बाद प्रो. गांधी बच्चों से मिले। उन्होंने अपनी बहन तारा के साथ अपने बचपन के किस्से साझा किए। प्रो. गांधी ने कहा कि बचपन की शिक्षा भविष्य में हमेशा काम आती है।
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उन्होंने देश-दुनिया में बढ़ रहे आतंकवाद पर चिंता जताई। प्रो. गांधी ने बच्चों को महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी के जयंती वर्ष की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने छात्रावास का भ्रमण कर बच्चों के साथ भोजन किया। इस अवसर पर महात्मा गांधी की पौत्रवधू ऊषा गांधी, स्कूल के प्रधानाचार्य हुकुम सिंह उनियाल समेत जिला सर्वोदय मंडल के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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