ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ईसाईयों का महान पर्व गुड फ्राइडे आज मनाया जाएगा। जिस सूली पर प्रभु यीशु को चढ़ाया गया था, उस सूली को प्रतीकात्मक रूम में गिरजाघरों में रखा जाएगा। अनुयायी सूली को एक-एक कर चूमेंगे। वहीं, गिरजाघरों में घंटियां नहीं बजाई जाएगी। वहीं, बृहस्पतिवार को पूर्व संध्या पर गिरजाघरों में प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया गया।
सेंट फ्रांसिस कै थोलिक चर्च के फादर वलेरियन पिंटू ने बताया कि शुक्रवार को दोपहर तीन बजे से कांवेन्ट के हॉल में क्रॉस ऑफ द रोड (14 मुकाम) कार्यक्रम होगा। जिसमें बाइबिल के पाठों से प्रभु यीशु के बलिदान को बताया जाएगा। उनके करीब तीन घंटे तक सूली पर लटके रहने की दास्तां बताई जाएगी। महान संत यीशु मसीह के मुख्य सात उपदेशों को बताया जाएगा। बताया कि गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह ने तमाम यातनाएं सहते हुए अपने प्राण त्याग थे। प्रभु ईसा धरती पर हो रहे अत्याचारों का विरोध और प्रेम, क्षमा का संदेश देते हुए सूली पर चढ़ गए थे। इसलिए इस दिन को लोग गुड फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे, ग्रेट फ्राइडे या ईस्टर फ्राइ-डे भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि इस दिन की खास बात ये है कि इस दिन प्राश्चातय और प्रार्थना के लिए है। इसलिए इस दिन गिरजाघरों में घंटियां नहीं बजाई जाती है।
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ऐसे मनाते है ये दिन खास
ईसाई मान्यताओं के अनुसार आमतौर पर पवित्र बृहस्पतिवार की शाम के प्रभु भोज के बाद उत्सव नहीं होता जब तक कि ईस्टर की अवधि नहीं बीत जाती। इसके साथ ही इस पूजा स्थल पूरी तरह से खाली रहता है। वहां क्रॉस, मोमबत्ती या वस्त्र कुछ नहीं रहता। प्रथा के अनुसार जल का आशीर्वाद पाने के लिए पवित्र जल संस्कार के पात्र खाली किए जाते है। इसके अलावा प्रार्थना के दौरान बाइबल और अन्य धर्म ग्रंथों का पाठ, क्रॉस की पूजा और प्रभु भोज में शामिल होने की प्रथा चली आ रही है।