ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों के अधीन निजी मेडिकल कॉलेजों में शुल्क बढ़ोतरी के विरोध में सीट छोड़ने वाले छात्रों को तीन वर्ष की फीस जमा करानी होगी। उधर, गत वर्ष शपथ पत्र के आधार पर दाखिला लेने वाले छात्रों के शुल्क न देने से कॉलेजों की परेशानी भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि कॉलेज का पूरा खर्च जोड़ने के बाद ही यह शुल्क बढ़ोतरी की गई है। छात्रों ने चूंकि गत वर्ष शपथ पत्र के आधार पर दाखिला लिया था, इसलिए उन्हें गत वर्ष से ही यह बढ़ी हुई फीस देनी होगी।
सरकार ने हाल ही में कैबिनेट बैठक में निजी मेडिकल कॉलेजों को इस आधार पर फ ीस तय करने का अधिकार दे दिया कि वह यूनिवर्सिटी हैं। इसमें स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी का हिमालयन मेडिकल कॉलेज, एसजीआरआर यूनिवर्सिटी का एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज और सुभारती यूनिवर्सिटी का सुभारती मेडिकल कॉलेज शामिल है। अब इन कॉलेजों ने मेडिकल पीजी और यूजी की फ ीस कई गुना बढ़ा दी है। जिसके बाद छात्र असमंजस की स्थिति में हैं। क्योंकि गत वर्ष उन्हें एमबीबीएस में दाखिला शपथ पत्र लेकर दिया गया था। यह शपथ पत्र इस बात का था कि फ ीस बढ़ी तो उन्हें देनी होगी। छात्रों के सामने एक समस्या और भी है। छात्र अब शपथ पत्र के आधार पर बढ़ा हुआ शुल्क देने से इंकार कर रहे हैं। जबकि सीट छोड़ने की स्थिति में नियम सख्त है। सीट छोड़ने पर छात्र को तीन वर्ष का शुल्क जमा कराना होगा। यानी जो सीट गत वर्ष छह लाख रुपये फीस पर ली थी, उसे छोड़ने के लिए करीब 51 लाख रुपये जमा कराने होंगे। कॉलेजों का तर्क है कि सीट खाली होने पर वह भरी नहीं जा सकती है। एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि कई छात्र अब शपथ पत्र से ही पल्ला झाड़ रहे हैं। वह बढ़ी फ ीस देने में आनाकानी कर रहे हैं।
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चार्टर्ड अकाउंटेंट ने मेडिकल कॉलेज की आय-व्यय के आधार पर मेडिकल की प्रति सीट के लिए आने वाले व्यय की एक रिपोर्ट तैयार की है। विश्वविद्यालय की शुल्क निर्धारण समिति ने उस रिपोर्ट के आधार पर एमबीबीएस की सीटों के लिए 19 लाख 76 हजार रुपये फीस 2017 बैच के लिए निर्धारित की है।
डॉ. अनिल कुमार मेहता, प्राचार्य, एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज
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फ ीस बढ़ोत्तरी केवल नए बैच पर लागू होगी या पुराने बैच को भी बढ़ी फ ीस देनी पड़ेगी, इस बारे में अब तक स्थिति साफ नहीं है। कैबिनेट में हुए फैसले की अभी लिखित जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।
- डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा