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आयुर्वेद विवि की भर्ती परीक्षा पर फिर विवाद

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की चिकित्साधिकारी भर्ती परीक्षा फिर विवादों में आ गई है। अभ्यर्थियों ने एक ही गाइड से एक ही सीरियल में प्रश्न आने के साथ ही सील खुले पेपर मिलने पर परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने इस परीक्षा की एसआईटी जांच की मांग की है। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परीक्षा में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। कहीं भी कोई समस्या नहीं है। प्रोविजनल रिजल्ट और आंसर की जारी कर आपत्तियां भी मांग ली गई हैं।
आयुर्वेद विश्वविद्यालय में चिकित्साधिकारी के 19 पदों पर भर्ती के लिए रविवार को 798 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। सोमवार को परीक्षा पर विवाद पैदा हो गया। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि जो प्रश्न पत्र उन्हें मिला, वह सीलबंद नहीं था। प्रश्न पत्र में एक ही गाइड से पेज नंबर 859 से 868 तक एक ही सीरियल के एक जैसे प्रश्न दे दिए गए हैं, जिससे संशय होता है कि प्रश्न पत्र पूरी तरह से लीक था। उनका आरोप है कि यह प्रश्न पत्र राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की 2007 में हुई परीक्षा की गाइड से लिए गए हैं।
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इसके अलावा अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया है कि परीक्षा में प्रश्न पत्र क्रमांक और उत्तर पुस्तिका क्रमांक भिन्न हैं। अभ्यर्थियों ने इसकी शिकायत राजभवन, मुख्यमंत्री, आयुष मंत्री और विवि कुल सचिव को की है। उन्होंने मांग की है कि पूरी प्रक्रिया को रोककर परीक्षा की एसआईटी जांच कराई जाए। ताकि अगर किसी की मिलीभगत से यह खेल किया जा रहा हो तो वह पकड़ में आ सके। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में करीब तीन साल से भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इस पर पहले भी कई बार विवाद हो चुके हैं।
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सुबह आंसर की, शाम तक आपत्ति खत्म
आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने 11 मार्च को आयोजित चिकित्साधिकारी परीक्षा की उत्तर कुंजी 12 मार्च को सुबह जारी की। इस पर शाम पांच बजे तक आपत्तियां मांगी गईं। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस परीक्षा में देशभर से युवा शामिल हुए हैं। किसी भी परीक्षा में आंसर की पर आपत्तियां सुनने के लिए समय दिया जाता है, लेकिन विवि ने कुछ ही घंटे का समय दिया है। अभ्यर्थी, विवि की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। उनकी मांग है कि आपत्तियां सुनने के लिए और समय दिया जाए।
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विश्वविद्यालय की ओर से चिकित्साधिकारी परीक्षा पूरी पारदर्शिता के साथ कराई गई है। हमने परीक्षा केंद्र की वीडियोग्राफी भी कराई है। केवल दस साल पुराना पेपर रिपीट किया है, जिसमें नियमत: कुछ भी गलत नहीं है। फिर भी जो आपत्तियां आई हैं, उन पर सुनवाई की जाएगी। हमारा मकसद पारदर्शिता के साथ सही कैंडिडेट का चयन करना है।
-प्रो.अभिमन्यु कुमार, कुलपति, आयुर्वेद विवि
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