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-दरबार साहिब झंडा मेला पैकेज की खबर-

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दरबार साहिब झंडा मेला पैकेज की खबर::
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102 साल बाद पूरी हुई अर्जुन की मां की अरदास

झंडा मेला में दर्शनी गिलाफ चढ़ाने वाले अर्जुन पहुंचे दून
परिवार में खुशी, मां ने मांगी थी अरदास
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून।
लुधियाना निवासी अर्जुन सिंह की मां की दर्शनी गिलाफ चढ़ाने की अरदास इस बार झंडे मेले में 102 साल बाद पूरी होने जा रही है। अर्जुन सिंह पूरे परिवार के साथ रविवार को देहरादून पहुंच गए। मंगलवार को वह झंडे जी पर गिलाफ चढ़ाएंगे। हालांकि मां जीत कौर इन खास लम्हों पर उनके साथ नहीं है। उनकी कई वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है। मां जीत कौर ने अरदास मांगी थी, जिसे बाद में परिवार भूल गया था। जब परिवार में दुख बढ़े तो गुरु के कहने पर मां ने दोबारा अरदास याद दिलाई। बेटे अर्जुन ने दोबारा पंजीकरण कराया तो अब 25 साल इंतजार के बाद गिलाफ चढ़ाने का सौभाग्य मिला है।
लुधियाना के नानकनगर गली नंबर 14 निवासी अर्जुन ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उनकी मां ने पूरे परिवार की सलामती के लिए करीब 102 साल पहले अरदास मांगी थी। चूंकि दर्शनी गिलाफ चढ़ाने के लिए लंबी कतार रहती है, इसलिए परिवार अरदास को भूल गया। अर्जुन सिंह ने बताया कि अचानक परिवार में दुख बढ़ गए। मां जीत कौर भी बीमार रहने लगी तो उनके गुरु के पास पहुंचे। गुरु ने अरदास की याद दिलाई। मां ने बेटे अर्जुन से दोबारा अरदास के लिए बोला। अर्जुन ने दोबारा पंजीकरण कराया और 25 साल इंतजार करने के बाद यह खास मौका आया है। अर्जुन इस मौके पर काफी खुश हैं। उन्होंने कहा कि मां तो अब इस दुनिया में नहीं रही लेकिन उनकी ख्वाहिश अब पूरी होने जा रही है। अर्जुन की पत्नी बिमलकौर स्वास्थ्य खराब होने की वजह से उनके साथ नहीं आ पाई। उनके साथ उनके बड़े बेटे गुरमख सिंह उनकी पत्नी मनजीत कौर और चार बच्चे भी इन ऐतिहासिक लम्हों के साक्षी बनने दून पहुंचे। अर्जुन सिंह विद्युत विभाग से रिटायर्ड हैं जबकि उनके दोनों बेटे प्राइवेट जॉब करते हैं।
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हर साल आते हैं श्री दरबार साहिब
अर्जुन सिंह के परिवार का श्री दरबार साहिब से बेहद गहरा लगाव है। उनका कहना है कि वह सेवाभाव से हर साल यहां आते हैं। इस साल जनवरी में वह परिवार के साथ श्री दरबार साहिब आए थे। खुशी की बात यह है कि एक माह बाद ही दोबारा दर्शनी गिलाफ चढ़ाने के लिए यहां आने का मौका मिला।
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