श्रीनगर। यूं तो मंजखोली गांव की मासौ गांव से पैदल दूरी मात्र दो किलोमीटर है, लेकिन मोटर मार्ग से जाना हो तो 55 किलोमीटर का फेरा काटना पड़ता है। इसकी वजह है कि नयार नदी में पुल का निर्माण न होना। हालांकि नयार नदी के दोनों ओर सड़क बनी है। पुल भी वर्ष 2012 में आधा अधूरा बना हुआ है। यदि पुल बन जाए तो खातस्यूं और मवालस्यूं पट्टी के लगभग एक दर्जन गांवों का सीधा यातायात संपर्क हो जाता। ग्रामीण 55 किमी के फेरे से बच जाएंगे। लोनिवि डिजाइन बदलने की बात कह रहा है।
खातस्यूं और मवालस्यूं पट्टी को जोड़ने के लिए वर्ष 2005 में पौड़ी-पोखरी खेत-ज्वालपा देवी मोटर मार्ग पर स्थित सीकूखाल से कंडेरी होते हुए मंजखोली गांव तक सड़क स्वीकृत हुई। वर्तमान में इस सड़क पर मंजखोली तक वाहन चलते हैं। इसके अलावा पोखरीखेत से गाड़-गड़लिया होते हुए मंजखोली तक भी मोटर मार्ग बना हुआ है।
लोगों की मांग को देखते हुए वर्ष 2007 में शासन ने पौड़ी-पाबौ-कोटद्वार मोटर मार्ग के मासौं से मंजखोली तक तीन किलोमीटर सड़क मंजूर की। मासौं और मंजखोली नयार नदी के आर-पार स्थित हैं। इसलिए पुल भी स्वीकृत हुआ।
वर्ष 2012 से नयार नदी के दोनों ओर एबटमेंट का भी निर्माण हुआ, लेकिन इसके बाद से काम आगे नहीं बढ़ा। वर्तमान में यदि किसी को कंडेरी, मंजखोली, गाड़, गड़लिया, ढुंक आदि गांवों से नदी पार जाना हो तो उनको सीकू या पोखरीखेत से घूमकर जाना पड़ता है।
जिस डिजाइन के आधार पर पुल निर्माण किया जा रहा था, उस पर पुल निर्माण न करने के शासन ने आदेश दिए हैं। अब डिजाइन में फेरबदल कर इस्टीमेट बनाया जा रहा है। प्रवीण बहुखंडी, अधिशासी अभियंता लोनिवि निर्माण खंड पौड़ी