इस दौरान पाया गया कि व्यापारी नियमित तौर पर ई-वे बिल जेनरेट नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं विधिवत रिटर्न भी जमा नहीं कर रहे हैं। जांच के दौरान 50 करोड़ से अधिक का अघोषित टर्नओवर प्रकाश में आया।
अधिकतर व्यापारियों ने जांच के दौरान ही देय कर शीघ्र राजकोष में जमा कराने की सहमति दी। अपर आयुक्त राकेश टंडन ने कहा, जल्द अन्य व्यापारियों की भी जांच की जाएगी।