उत्तरकाशी जिले के उन 42 गांवों में विकास की नई राह खुलने जा रही है। अब तक गोविंद पशु विहार के दायरे में फंसे पड़े इन गांवों को प्रदेश सरकार ने पार्क क्षेत्र से बाहर कर दिया है।
बुधवार को जारी हुए गोविंद विहार नेशनल पार्क के नोटीफिकेशन में ये गांव सेंचुरी क्षेत्र से बाहर दिखाए गए। इन गांवों के निवासियों की अरसा पुरानी मांग थी। उनका विकास प्रभावित हो रहा था।
अनुमति लेने की बाध्यता खत्म
किसी भी गतिविधि के लिए उन्हें पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से अनुमति लेने की बाध्यता थी। इसके चलते सरकारी विकास योजनाओं का भी लाभ इन ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा था।
इसी साल केंद्र सरकार ने गोविंद विहार नेशनल पार्क को अनुमति देते हुए उसकी सीमाएं निर्धारित की थी। जिसका नोटीफिकेशन बुधवार को कर दिया गया। पार्क की सीमा से बाहर हुए 42 गांवों की करीब 18 हजार आबादी है।
सांसद रहते समस्या उठाई थी
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने बताया कि टिहरी सांसद रहते उन्होंने इन ग्रामीणों की समस्या उठाई थी और तत्कालीन राज्य सरकार से इन गांवों को पार्क सीमा से बाहर करने की पैरवी की थी।
अब जाकर इसमें सफलता मिली है। पार्क सीमा से बाहर होने से इन गांवों में विकास को नया आयाम मिलेगा और अन्य गतिविधियां भी ग्रामीण कर सकेंगे।
इन गांवों को किया बाहर
रुपिन रेंज- सेवा, ग्यालगांव, मसरी, बरी, खन्ना, हडवाड़ी, गौंड़ी, सट्टा, भितरी, देवल, पुजेली, खनियातनी, नुरांण।
सुपिन रेंज- कोट गांव, सिंदरी, पाव मल्ला, पाव तल्ला, राकुड़ी, सुलकुंडी, जखोल, सावनी, धारा, पिताड़ी, रैबचा, कासला, राला, निवाड़ी, कला, नैटवाड़, गैरतड़ गांव, देवरा, स्वांण गांव, दनगण गांव, हल्टाड़ी।
सांकरी रेंज- सिरमा, सौड़, सांकरी, पीरा, कोसला, गंगाड़, कवांड़ी, ठाडमीर।