श्री कालिका मंदिर के 66वें ध्वजारोहण महोत्सव में मंगलवार को शक्तिमान महासम्मेलन शुरू हो गया। तीन दिवसीय महासम्मेलन के पहले दिन दिल्ली से पहुंचे महामंडलेश्वर स्वामी अबुतानंद महाराज ने कृष्ण और कृृष्णा का महत्व समझाया।
स्वामी अबुतानंद महाराज ने कहा कि कृष्ण और कृृष्णा शक्तिमान के रूप हैं। किशन का अर्थ है काला और कृष्णा भद्रकाली का रूप है जो मानव को अद्वैत दर्शन कराती हैं। किशन का शक्ति स्वरूप मां कृष्णा ही हैं। प्रकृति के अस्तित्व को संवारना व संहार करना शक्ति के ही रूप है। गुजरात से पहुंचे संत सर्वेश बापू ने कहा कि संत शब्द रूप नहीं हैं। संत की महिमा का गुणगान ब्रह्मा, विष्णु, महेश, कवि व कोविद भी नहीं कर सकते। सत्य को बुद्धि में परम रूप से धारण करना ही शक्ति सम्मेलन है। स्वामी काका हरि ओम महाराज ने कहा कि शक्ति के रूप की व्याख्या संत जनों के माध्यम से ही संभव है। इसके पहले मंदिर के महोत्सव में देश भर से पहुंचे 108 ब्राह्मणों ने मां दुर्गा का सप्तशती पाठ किया। मां दुर्गा के स्वरूप मां कूष्मांडा की विशेष पूजा अर्चना की गई। मंदिर समिति की ओर से आयोजित विशाल भंडारे में मां के भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर गगन सेठी, रमेश साहनी, एलडी भाटिया, दयाल धवन, साहिब राम डोरा, उमेश मिनोचा, सतीश कक्कड़, एनके दत्ता, संजय आनंद, कमल गुप्ता, मुरली चांदना, केवल आनंद, कुंवर राजेंद्र वर्मा, संजय चांदना, संजीव शर्मा, राम स्वरूप भाटिया, हरीश कक्कड़, नरेश मैनी, श्याम अरोरा, अनिरुद्ध गुप्ता आदि मौजूद रहे।
रंग बरसे मैया के द्वारे रंग बरसे...
चैत्र नवरात्र के अवसर पर श्री पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर में आयोजित भजन संध्या में महिला भजन मंडली ने रंग बरसे मैया के द्वारे रंग बरसे, चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है.. भजनों की प्रस्तुति दी। महंत श्री श्री 108 रविंद्र पुरी महाराज ने मां कूष्मांडा देवी की पूजा अर्चना की। मंदिर समिति की ओर से बुधवार को कलश यात्रा का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर दिगंबर भागवत पुरी, दिगंबर दिनेश पुरी, राजेंद्र आनंद, नरेंद्र ठाकुर, विक्की गोयल, अनुराग अग्रवाल, शशिकांत सिंगल, दिलीप सैनी, विनोद अग्रवाल, इंद्रेश सनूजा, अनिल गोयल आदि मौजूद रहे। उधर, गढ़ी कैंट स्थित माता वैष्णो देवी गुफा योग मंदिर, टपकेश्वर में चैत्र नवरात्र के मौके पर आयोजित विशेष पूजा अर्चना में विदेशी भक्तों ने भी भाग लिया। इस मौके पर मंदिर के संस्थापक आध्यात्मिक गुरु आचार्य बिपिन जोशी, डॉ. मथुरा दत्त जोशी, भगवती जोशी, मालती महर, गीता जोशी, पंडित अरविंद नौटियाल, पंडित दीपेंद्र, नौटियाल आदि मौजूद रहे।