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स्कूली बच्चे जगाएंगे पर्यावरण संरक्षण की अलख

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स्कूली बच्चे जगाएंगे पर्यावरण संरक्षण की अलख
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। देश में वन संपदा और पर्यावरण के संरक्षण में वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के अलावा देशभर के स्कूलों के लाखों बच्चों की भी मदद ली जाएगी। इसके लिए भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) और केंद्रीय विद्यालय संगठन के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के तहत आईसीएफआरई की ओर से पूरे देश में प्रकृति कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। जिसमें करोड़ों स्कूली बच्चों की सहभागिता होगी।
शुक्रवार को वन अनुसंधान संस्थान के निदेशक अरुण प्रताप सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में तमाम मुद्दों पर चर्चा की गई। इस मौके पर निदेशक रावत ने कहा कि वन संपदा एवं पर्यावरण मानव जाति की जीवन रेखा है। वर्तमान हालातों को देखते हुए लोगों को वन संपदा एवं पर्यावरण संरक्षक के प्रति जागरूक करना जरूरी हो गया है। इसी के तहत केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की पहल पर प्रकृति कार्यक्रम शुरू किया गया है। जिसमें युवा पीढ़ी को शामिल किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि वन अनुसंधान संस्थान वानिकी अनुसंधान एवं पर्यावरण के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान है। संस्थान ने पर्यावरण हितैषी कई तकनीक विकसित की हैं। निदेशक ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि संस्थान में केंद्रीय विद्यालय संगठन के छात्रों एवं अध्यापकों को प्रशिक्षण के दौरान हर संभव सुविधा दी जाएगी।
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बैठक में डॉ. एके पांडेय, केन्द्रीय विद्यालय संगठनों से आए उपायुक्त एसएस रावत, वीके पांडेय, एके पंत, सहायक आयुक्त अल्का गुप्ता, नीता खुराना, टी. रुकमणि, मीनाक्षी, वीएन बहुखंडी, डॉ. पीएस रावत, डॉ. चरण सिंह, डॉ. देवेंद्र कुमार, रामबीर सिंह, अजय गुलाटी, विजय कुमार समेत कई वैज्ञानिक व अधिकारी उपस्थित थे।
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