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अधिकारियों पर कार्रवाई से बच रही सरकार

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद प्रदेश सरकार अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार साडा (स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) के अधिकारियों पर कार्रवाई करने से बच रही है। बीते 19 जून को हाईकोर्ट ने अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार साडा अधिकारियों के खिलाफ एसआईटी जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन एक महीना बीतने के बाद भी मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।
बीते 18 जून को हाईकोर्ट ने शहर की सड़कों से चार सप्ताह में अतिक्रमण हटाने के लिए मुख्य सचिव को आदेश दिए थे। इसके अनुपालन में 26 जून को आदेश की कॉपी मिलने के बाद टास्क फोर्स का गठन कर 28 जून से अतिक्रमण ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। वहीं, इस आदेश के एक दिन बाद 19 जून को हाईकोर्ट ने एसआईटी गठित कर अतिक्रमण कराने वाले साडा अधिकारियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। इस पर खानापूर्ति करते हुए पहले अपर सचिव भूपाल सिंह मनराल को इसकी जांच की जिम्मेदारी दी गई। मामला आगे बढ़ता कि जांच गढ़वाल कमिश्नर शैलेश बगोली को सौंप दी गई, लेकिन विभागीय सूत्रों की मानें तो अभी जांच शुरू हुई है।
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एसआईटी पर जताई अनभिज्ञता
हाईकोर्ट ने एसआईटी गठित कर अतिक्रमण कराने के जिम्मेदार साडा अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को कहा था। इसके लिए कम से कम एसएसपी और आईजी रैंक के किसी अधिकारी को नियुक्त किया जाना था। लेकिन, वर्तमान में मामले को देख रहे गढ़वाल कमिश्नर शैलेश बगोली ने एसआईटी गठन की बात पर अनभिज्ञता जताई। उनका कहना था कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है।
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साडा में आते हैं यह क्षेत्र
साडा क्षेत्र में हरबर्टपुर, विकासनगर और देहरादून शहर से लगे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अवैध निर्माण कराए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगर मामले की जांच होती है तो साडा के तत्कालीन अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
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मुझे अतिक्रमण कराने के लिए जिम्मेदार साडा अधिकारियों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पर काम चल रहा है। -शैलेश बगोली, गढ़वाल कमिश्नर
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