ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देने की मांग को लेकर पूर्व विधायक राजकुमार बृहस्पतिवार को मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि पूर्व की कांग्रेस सरकार ने मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देने की कार्ययोजना बनाई थी। मलिन बस्तियों के रख-रखाव को 400 करोड़ रुपये भी पास किए गए थे। लेकिन विधानसभा चुनाव और आचार संहिता लगने के कारण प्रक्रिया बीच में ही रुक गई थी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की मलिन बस्तियों को तीन भागों में वर्गीकृत करने के सुझाव भी दिए थे, जिसे मंत्रिमंडल समिति ने स्वीकार किया था। शहरी विकास मंत्री ने निकाय चुनाव के बाद बस्तियों के नियमितीकरण करने की बात कही है। अगर सरकार को ऐसा करना है तो निकाय चुनाव से पहले करें। मलिन बस्तियों के नियमितीकरण को लेकर उनके द्वारा मुंबई अहमदाबाद आदि की बस्तियों का विधिक व स्थल निरीक्षण कर तुलनात्मक अध्ययन कर मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय एवं नगर विकास कार्यालय को दी गई थी। उन्होंने कहा मलिन बस्तियों के सुधार, नियमितीकरण, पुनर्वासन व अतिक्रमण निषेध अधिनियम 2016 का भी नए सिरे से रिव्यू करने की बात कर रही है, लेकिन अभी तक कोई भी कार्य धरातल पर नहीं है। उन्होंने मलिन बस्तियों को जल्द मालिकाना हक नहीं देने पर आंदोलन की चेतावनी दी।