कविताओं में झलका पहाड़ का दर्द
ब्यूरो/अमर उजाला /देहरादून।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, राष्ट्रीय कला मंच की ओर से आयोजित दो दिवसीय मंडाण कार्यक्रम के अंतिम दिन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान एक ओर कवियों ने अपनी कविता से खूब गुदगुदाया तो वहीं दूसरी ओर पलायन का दर्द भी पेश किया।
यमुना कॉलोनी स्थित मैदान में आयोजित कवि सम्मेलन में ओम प्रकाश सेमवाल के ‘माछा पक माछा पक डोंका, हाल बुरा छन हमरा गौं का’ में पलायन के प्रति राजनेताओं की पहाड़ विरोधी सोच और स्वयं के दोषी होने की बात रखी गई। कवि तेजपाल सिंह रावत, सुधीर बर्त्वाल , डॉ. मनीष सेमवाल, उमा भट्ट, जगदंबा चमोला ने हास्य-व्यंग्य रचना से पहाड़ का दर्द समझाने का प्रयास किया। इसके बाद लोक गायक सौरभ मैठाणी ने चैता की चैत्वाली, पूनम सती ने धरती हमरा गढ़वाल की लोकगीत से समां बांध दिया। सम्मेलन में आए मुख्य अतिथि आरएसएस के विभाग कार्यवाहक अनिल चंदा ने कहा कि एबीवीपी राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है। एबीवीपी जिस तरह से संस्कृति की रक्षा के लिए प्रयास कर रहा है, वह सराहनीय है। इस मौके पर संगठन मंत्री मनोज निखरा, प्रांतीय संगठन मंत्री प्रदीप शेखावत, संगठन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. डीके शही, सोरन उनियाल, अरुण चमोली, डॉ. ममता सिंह, तरुण जैन आदि मौजूद रहे।