अमर उजाला ब्यूरो
श्यामपुर।
आजादी के 70 वर्षों में भी हरिद्वार जैसे जिले के कई गांव पीने के पानी के लिए नहरों पर निर्भर हैं। श्यामपुर रेंज के जंगल में बसे मुडाल, सिंबल, पापडी, स्रोत के वनगुर्जरों के लिए बिजली-पानी की व्यवस्था नहीं होने से महिलाएं दिनभर पानी ढोने में लगी रहती हैं।
श्यामपुर रेंज के जंगल मे बसे वन गुर्जर फिरोज, आलमगीर, ईशा, सैनू, जहूर, शमशाद, गामा, यूसुफ, इनाम अली, शमशेर, इंतजार आदि का कहना है कि वनगुर्जरों का पनर्वास नहीं होने से कई परिवार जंगल में ही रहकर जीवन यापन कर रहे हैं। जंगल में पेयजल लाइन बिछज्ञने की अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में वन गुर्जरों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। जीवन यापन के लिए वन गुर्जरों को भीमगोड़ा बैराज से बिजनौर- मुरादाबाद के किसानों की खेती के लिए निकाली गई पूर्वी गंगनहर से पानी ले जाकर पीना पड़ता है। नहर के बंद होने पर कई किलोमीटर दूर श्यामपुर व गाजीवाली गांव से प्लास्टिक के कैन से पानी ढोकर वह अपनी जरूरतें पूरी करते हैं। वन गुर्जरों ने वन विभाग के अधिकारियों से पेयजल लाइन बिछाने की अनुमति देने अथवा हैंडपंप लगाने की गुहार लगा चुके हैं, अधिकारी नियमों का हवाला देकर जंगल में हैंडपंप लगाने की अनुमति देने से इन्कार कर देते हैं।
जिन स्थानों पर वन गुर्जर बसे हैं, वहां पर भू- जल स्तर 200 फीट से अधिक नीचे है। यहां पर छोटे हैंडपंप काम नहीं करते। सरकारी हैंडपंप या गहरे पंप लगाने के लिए डीएफओ या कंजरवेटर से अनुमति लेनी पड़ती है। - यशपाल सिंह राठौर, रेंजर, श्यामपुर रेंज।