तीन महीने की बारिश ने उत्तराखंड में 3760 किमी से अधिक सड़कें बहा दीं या तोड़ दी हैं। 12 महीने में जितनी सड़कें बन नहीं पाईं, उतनी बारिश में मलबे के साथ बह गई हैं।
सबसे ज्यादा सड़कें उन ग्रामीण इलाकों में क्षतिग्रस्त हुई हैं, जहां पहले से आने-जाने में दिक्कत होती है। इन सड़कों को बनवाने के लिए प्रदेश शासन ने केंद्र सरकार से साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये मांगे हैं। इस संबंध में केंद्र को प्रस्ताव भेज दिया गया है।
प्रदेश में मई के आखिरी हफ्ते में पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश की शुरुआत ने अगस्त तक आते-आते साढ़े तीन हजार किमी से अधिक सड़कों को क्षतिग्रस्त कर दिया है। चमोली और पिथारौगढ़ जिले इससे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। बारिश से प्रभावित सड़कों के सर्वेक्षण में पाया गया कि सबसे अधिक नुकसान ग्रामीण इलाकों में हुआ है।
गांवों की सबसे अधिक 2700 किमी सड़कें बही हैं। ग्रामीण इलाकों की सड़कों में सबसे अधिक संपर्क मार्ग हैं, जो एक गांव को दूसरे से जोड़ते हैं। इसके अलावा 1000 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभावित हुआ है।
अतिवृष्टि और भूस्खलन से प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग जगह-जगह टूट गया है। 600 किमी प्रांतीय राष्ट्रीय राजमार्ग को नुकसान हुआ है। जैसे-तैसे इन टूटे रास्तों पर मिट्टी डाल कर काम तो चला लिया गया है, लेकिन इन्हें बनाने में साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये से अधिक खर्च आएगा। इसके लिए प्रदेश शासन ने आपदा प्रबंधन के मद में केंद्र को प्रस्ताव भेजा है।
इस वित्तीय वर्ष में एक हजार किमी सड़कें बनेंगी
इस वित्तीय वर्ष में एक हजार किमी सड़कें बनाने का लक्ष्य मुख्यमंत्री हरीश रावत ने लोक निर्माण विभाग को दिया है। उन्होंने कहा कि इस साल एक हजार किमी सड़कें बनाने के काम अभियान के तौर पर किया जाए। नए अंडरपास, फ्लाई ओवर, टनल आदि की कार्ययोजना तैयार कर ली जाए।
मुख्यमंत्री घोषणाओं की योजनाओं पर फास्ट ट्रैक मोड पर काम किया जाए। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंगलवार को बीजापुर गेस्ट हाउस में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत संचालित और प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों की सड़कों का निर्माण सीएम घोषणाओं के तहत होना है, उनका कार्य जल्दी से शुरू किया जाए और निर्धारित समय सीमा में ही पूरा किया जाए। इनका निर्माण फास्ट ट्रैक मोड पर किया जाए।
बैठक में जानकारी दी गई कि लोक निर्माण विभाग से संबंधित लगभग 75 प्रतिशत घोषणाओं पर अमल शुरू हो गया है। 10 प्रतिशत योजनाओं को फेज-1 में शामिल किया गया है। इसकी प्रक्रिया पूरी की जा रही है और शेष की डीपीआर तैयार की जा रही है। वित्तीय वर्ष में एक हजार किमी सड़कों के लक्ष्य के मद्देनजर बताया गया कि अधिकांश में काम शुरू हो गया है। बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव डीएस गर्ब्याल, सचिव वित्त अमित नेगी, प्रभारी सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी आदि रहे।