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वन के समुचित प्रबंधन से विकसित होंगे आजीविका के नए साधन

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समुचित प्रबंधन से विकसित होंगे आजीविका के नए साधन
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। ‘एकेडमी ऑफ फारेस्ट एंड इंवायरमेंट साइंस’ की ओर से भारतीय वन सर्वेक्षण में तीन दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन विज्ञानियों ने वन संसाधनों के समुचित प्रबंधन से आजीविका के नए साधन विकसित किए जाने पर जोर दिया। वहीं विज्ञानियों ने देहरादून चिड़ियाघर का भी भ्रमण किया।
कार्यशाला में पूर्व प्रमुख वन संरक्षक व कार्यशाला संयोजक डॉ. आरबीएस रावत ने कहा कि उत्तराखंड समेत देश के कई राज्यों में अपार वन संपदाएं हैं, जिनका समुचित इस्तेमाल कर जंगलों के आसपास रहने वालों के जीवन को खुशहाल बनाया जा सकता है, लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि इसका असर पर्यावरण पर न पड़े। पूर्व प्रमुख वन संरक्षक दिनेश खंडूरी व भारतीय वन अनुसंधान संस्थान के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एमएन झा ने वन संरक्षण व आजीविका निर्माण में जन संचार साधनों की भूमिका पर अहम जानकारी साझा की।
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कार्यशाला में वन संरक्षक पीके पात्रो ने कहा कि सकारात्मक प्रबंधकीय सोच के साथ वन और वन्यजीवों दोनों का संरक्षण संभव है। पात्रो ने देहरादून चिड़ियाघर का जिक्र करते हुए कहा कि यह देश ही नहीं बल्कि दुनिया का अनूठा चिड़ियाघर है। यह शोध व शिक्षण के साथ ही मनोरंजन स्थल के तौर पर विकसित हुआ है।
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वहीं कार्यशाला के दूसरे दिन विज्ञानियों ने देहरादून चिड़ियाघर का भ्रमण किया। चिड़ियाघर के मुख्य पशुपालन अधिकारी डॉ. राकेश नौटियाल ने विज्ञानियों को चिड़ियाघर में मौजूद सभी पशु-पक्षियों के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर चिड़ियाघर के वनाधिकारी वीके लिंगवाल, मनोज चमोली आदि उपस्थित थे।
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