ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। दून अस्पताल की ओपीडी और थिएटर का निर्माण कार्य कर रही एक कंपनी के मालिक ने पत्रकार वार्ता कर यूपी राजकीय निर्माण निगम के अधिकारियों पर उनके नाम से दूसरे ठेकेदारों को करोड़ों रुपये का भुगतान करने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की। आरोप लगाया कि उन्होंने छह माह पूर्व इसकी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी शिकायत की थी, लेकिन जांच के आदेश के बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
बुधवार को एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक आरिफ कादरी ने पत्रकार वार्ता कर यूपी राजकीय निर्माण निगम के अधिकारियों व अभियंताओं पर एक ही छत की दो बार पैमाइश कर एक कंपनी को 19,24,639 रुपये का भुगतान करने का आरोप लगाया। जबकि संबंधित कंपनी का ओपीडी निर्माण से कोई लेना देना नहीं है। एक अन्य ठेकेदार को 41,35,033 रुपये चेक के जरिये भुगतान किया गया। आरोपों के मुताबिक अधिकारियों ने 9,93,000,00 रुपये का भुगतान बिना कार्य करने के ही कर दिया है। इतना ही नहीं अधिकारियों ने आपरेशन थिएटर के निर्माण के नाम पर भी साढ़े चार करोड़ रुपये की बंदरबांट की है। उसकी कंपनी के नाम पर ढाई करोड़ का फर्जी भुगतान किया गया है। जबकि इस भुगतान के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है।
उन्होंने यूपी राजकीय निर्माण निगम के महाप्रबंधक अरविंद तिवारी, परियोजना प्रबंधकों सतीश कुमार उपाध्याय, आशुतोष दूबे, बृज बिहारी चाहर, इंजीनियर राकेश कुमार राय, लेखाकार विजेंद्र कुमार और एआरआई अनुराग चौधरी के खिलाफ जांच की मांग की। इस संबंध में जब महाप्रबंधक अरविंद तिवारी व परियोजना मैनेजर सतीश कुमार उपाध्याय से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया। उनका पक्ष आने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
कई के खिलाफ यूपी में चल रही जांच
जिन अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ जांच की मांग की जा रही है उनमें से एसके उपाध्याय, आशुतोष कुमार दूबे, अनुराग चौधरी, राकेश कुमार राय और विजेंद्र कुमार के खिलाफ यूपी सरकार की ओर से जांच कराई जा रही है। निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक राजन मित्तल की ओर से जांच के आदेश 30 नवंबर को जारी किए गए हैं।