नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल के विरोध में उतरी आईएमए
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) राज्य शाखा ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग को चेतावनी दी है कि यदि संसद में नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल पारित किया गया तो एसोसिएशन राज्य में आयुष्मान भारत योजना सहित केंद्र व राज्य सरकार की ओर से संचालित तमाम स्वास्थ्य योजनाओं का बहिष्कार कर देगी।
आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विपिन चंद्र पांडे और महासचिव डॉ. डीडी चौधरी का कहना है कि नौकरशाहों के दबाव में केंद्र सरकार नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल को संसद में पारित कराना चाह रही है। यदि इस बिल को संसद में पारित कर लागू किया गया तो देशभर के डॉक्टर इसका विरोध करेंगे। एसोसिएशन की ओर से चेन्नई में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की बैठक में शामिल होकर लौटे दोनों पदाधिकारियों का कहना है कि इस मुद्दे पर वहां विस्तार से चर्चा हुई और निर्णय लिया गया कि यदि बिल को लागू किया गया तो देशभर के डॉक्टर इसका बहिष्कार करेंगे।
महासचिव चौधरी का कहना है कि यदि नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल को पारित किया जाता है तो इससे न सिर्फ मेडिकल की पढ़ाई महंगी हो जाएगी बल्कि चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सीधा असर पड़ेगा। बिल के पारित होने के बाद निजी मेडिकल कॉलेजों पर सरकार का कोई अंकुश नहीं रह जाएगा और वह मनमाने तरीके से करोड़ों की फीस वसूलेंगे। महंगी मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद जो भी डॉक्टर सरकारी व निजी सेवाओं में जाएंगे वे मरीजों का महंगा इलाज करेंगे जो करोड़ों गरीबों के लिए परेशानी भरा होगा।