ब्यूरो/अमर उजाला/ देहरादून।
हज यात्रा 30 से 35 हजार रुपये महंगी हो गई है। इसके पीछे रुपये के अवमूल्यन के साथ ही जीएसटी, सब्सिडी खत्म करने को वजह माना जा रहा है। दूसरी ओर, 35 हज यात्रियों ने लॉटरी से चयन होने के बावजूद पैसे का इंतजाम न होने की वजह से हज यात्रा छोड़ दी है। वहीं हज यात्रा छोड़ने वालों के स्थान पर दूसरों को मौका दिया गया है।
राज्य हज समिति के टीकाकरण एवं प्रशिक्षण शिविर में बृहस्पतिवार को हज यात्रा की महंगाई का मुद्दा भी छाया रहा। यात्रा के लिए चयनित लोगों का कहना था कि इस बार हज यात्रा की राह ज्यादा खर्च की वजह से मुश्किल हो गई है। हज समिति के अध्यक्ष हाजी राव शेर मोहम्मद के मुताबिक, सभी हज यात्रियों ने पूरा भुगतान कर दिया था। इस बीच रुपये का अवमूल्यन हो गया। इस वजह से निर्देश मिले थे कि कुछ पैसा और जमा कराया जाएगा। लिहाजा, सभी हज यात्रियों ने आठ-आठ हजार रुपये अतिरिक्त जमा कराए हैं। इसके अलावा अभी तक हज यात्रा पर 14 प्रतिशत सर्विस टैक्स लगता था जो कि अब जीएसटी आने के बाद 18 प्रतिशत हो गया है। इससे भी हज यात्रा के खर्च पर असर पड़ा है। दूसरी ओर हज यात्रा पर सब्सिडी खत्म करने से भी खर्च बढ़ गया है। कुल मिलाकर इस बार हज यात्रा 30 से 35 हजार रुपये महंगी हो गई है। इसमें अजीजिया श्रेणी के लिए हज यात्रा का कुल खर्च करीब 2.33 लाख रुपये और ग्रीन श्रेणी के लिए 2.68 लाख रुपये हो गया है।
30 लोगों ने छोड़ी हज यात्रा
हज यात्रा के बढ़े हुए खर्च के बीच इंतजाम न होने की वजह से करीब 30 लोगों ने इस साल हज यात्रा छोड़ दी है। हज कमेटी के चेयरमैन हाजी राव शेर मोहम्मद ने बताया कि इन सभी की जगह दूसरे प्रतीक्षारत हाजियों को मौका दे दिया गया है। इस साल 1300 लोग हज यात्रा पर जा रहे हैं।