ब्यूरो/अमर उजाला/ देहरादून।
प्रदेश में शुक्रवार से एमबीबीएस के दाखिले तो शुरू होने जा रहे हैं, लेकिन फीस को लेकर असमंजस बरकरार है। हिमालयन इंस्टीट्यूट जौलीग्रांट ने बृहस्पतिवार को एक विज्ञापन जारी करते हुए कहा कि उनके पास उत्तराखंड के छात्रों के लिए 40 प्रतिशत सीटें हैं। हालांकि हाईकोर्ट में चल रहे वाद के तहत वह बढ़ी हुई फीस ही वसूलेंगे।
वहीं चिकित्सा शिक्षा विभाग का तर्क है कि काउंसिलिंग बोर्ड ने नियमों के हिसाब से सीट आवंटन कर दिया है। शुल्क को लेकर भी पहले से ही स्थिति साफ है। प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों ने राज्य कोटे की सीटों के लिए 11 लाख और ऑल इंडिया मैनेजमेंट कोटे की सीटों के लिए 15 लाख रुपये शुल्क लेने की घोषणा की है। जबकि सरकार ने तय किया हुआ है कि जब तक हाईकोर्ट का फैसला नहीं आता है, तब तक राज्य कोटे की सीट पर चार लाख और ऑल इंडिया मैनेजमेंट कोटे के लिए पांच लाख रुपये शुल्क लेना होगा। बृहस्पतिवार को नीट की सीट आवंटन होने के बाद अब छात्रों के लिए सबसे बड़ा असमंजस फीस की खींचतान को लेकर है। छात्रों को डर है कि कहीं कॉलेज में वह दाखिला लेने जाएंगे तो उनसे ज्यादा शुल्क न मांगा जाए। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना का कहना है कि काउंसिलिंग बोर्ड ने नीट के नियमों के हिसाब से सीटें आवंटित कर दी हैं। सरकार ने शुल्क को लेकर पहले ही अपना रुख साफ किया हुआ है। ऐसे में कॉलेजों से अपेक्षा की जाती है कि वह नियमों के अनुपालन में सहयोग करें। बाकी, हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद जो भी शुल्क को लेकर आदेश आएगा, उसका अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा।