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आंदोलनकारियों के प्रति गंभीर नहीं रहीं सरकारें

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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राज्य आंदोलनकारियों के बलिदान के बदौलत ही उत्तराखंड अलग राज्य बना और गौरव मिला। इसके बावजूद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राजनीतिक दलों की सरकारों ने राज्य आंदोलनकारियों के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई।
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ये आरोप उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी कर्मचारी कल्याण परिषद के वक्ताओं ने शनिवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित धरने के दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों की सरकारों पर जड़े। वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान ने कहा कि आज तक सत्ता में सरकारों ने राज्य आंदोलनकारियों के भविष्य के लिए गंभीरता से कोई काम नही किया। जबकि हकीकत यह है कि आज जो भी सरकार सत्ता में है या पूर्व में रही है वे सभी राज्य आंदोलनकारियों व शहीदों के बलिदान की बदौलत रहीं। रविंद्र जुगरान ने आंदोलनकारियों को 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण व्यवस्था को लागू करने की मांग उठायी। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को क्षैतिज आरक्षण संबंधी विधेयक को जल्द ही वापस लौटाना चाहिए। राज्य आंदोलनकारी जेपी पांडे ने कहा कि आंदोलनकारियों के बलिदान के चलते ही राज्य का निर्माण हुआ है। इसके बावजूद सरकारों द्वारा राज्य आंदोलनकारियों के कल्याण के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाना दुखद है। धरने को राज्य आंदोलनकारी मंच के महासचिव रामलाल खंडूरी, जगमोहन नेगी, रविंद्र सोलंकी, विनोद चमोली, नवल शर्मा, दीपक बर्थवाल, बृज मोहन जोशी, पूरण सिंह राणा, पीतांबर पांडे, सुभाष, कमल, विजय मिस्त्री, बलवंत सिंह, सुंदरलाल पांडे, केके बिजल्वाण सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
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