ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
दून घाटी रंगमंच की ओर से आयोजित 16वें भारत संस्कृति दर्पण नाटक महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को लोक नृत्य और नाटकों के मंचन की धूम रही। चार दिन तक चलने वाले महोत्सव के दूसरे दिन पहले सत्र में लोक नृत्य प्रतियोगिताएं हुईं, जबकि दूसरे सत्र में विभिन्न प्रदेशों से आए कलाकारों ने नाटकों के मंचन से दर्शकों का मन मोहा।
सोमवार सुबह पहले सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि संस्कार भारती की प्रदेश उपाध्यक्ष सविता कपूर ने दीप जलाकर किया। जिसमें सीनियर, जूनियर वर्ग में एकल, युगल और समूह नृत्य प्रतियोगिताएं र्हुइं। कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोहा।
वहीं, शाम को दूसरे सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि उद्योगपति राकेश ओबरॉय ने दीप जलाकर किया। इसके बाद ओडीसा से आई सात वर्षीय अवंतिका ने शानदार लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके बाद अलग-अलग राज्यों से आए कलाकारों ने नाटकों का मंचन किया। कटिहार स्कूल ऑफ ड्रामा बिहार ने मुंशी प्रेमचंद की कहानी पर आधारित नाटक सद्गति का मंचन कर छुआछूत को मिटाने का संदेश दिया। विश्व रूपम कला मंच वाराणसी के कलाकारों ने चौराहे पर नाटक के मंचन से पारिवारिक व्यवस्थाओं में लापरवाही को उजागर किया। उत्कर्ष समाज सेवी संस्थान धमतरी छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने बिस्मिल के लिखे नाटक पतलून का मंचन कर वंचितों की महादशा का वर्णन किया। उड़ान थियटर आर्ट सोसाइटी बीकानेर राजस्थान के कलाकारों ने मंजूलता रांकावत के लिखे नाटक आखिरी पड़ाव का मंचन किया। जिसमें माता-पिता के वृद्धा आश्रम में रहने की मार्मिक कहानी का वर्णन किया गया। अंत में शब्द सांस्कृतिक अनुष्ठान हीराकुंड संबलपुर ओड़ीसा के कलाकारों ने बिरूपाक्ष प्रधान की लिखी पवित्र रिश्ता का मंचन कर मानव जीवन में आपसी संदेह व अविश्वास से होने पैदा होने वाली दूरियों का प्रदर्शन किया। आयोजकों ने बताया कि महोत्सव में 17 राज्यों से करीब 400 कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। इस मौके पर सुभाष चंद्र विरमानी, लक्ष्मी नारायण, नीनू सहगल, महेश नारायण, तेज सिंह राठौर, सोमप्रकाश बाल्मीकि, चंद्रगुप्त विक्रम, अनिल वर्मा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।