फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मां-बेटी की संदिग् ध परिस्थितियों में मौत

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

हरिद्वार।
कनखल क्षेत्र में महिला महाविद्यालय से चंद कदमों की दूरी पर आम के बाग में नेपाली मूल की एक महिला और उसकी एक साल की मासूम बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। हालांकि पुलिस का प्रथम दृष्टया यह मानना है कि मासूम बेटी को फांसी के फंदे पर लटकाकर महिला ने खुद भी मौत को गले लगाया होगा। पेशे से चालक पति मौके से फरार है। एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया।
मूल रूप से नेपाल के गांव धनवाडी वार्ड नंबर आठ जिला कईलाली निवासी मानदेव जोशी यहां जगजीतपुर निवासी लल्लू वैद्य के बाग में झोपड़ी बनाकर रहता है। उनका बड़ा बेटा ओमप्रकाश पेशे से चालक है, और वह भी अलग अलग झोपड़ी बनाकर रहता है।
विज्ञापन

एक प्राइवेट स्कूल का बस चालक ओमप्रकाश सुबह स्कूल चला गया। करीब साढ़े आठ बजे वह साइकिल से वापस आया। पहले पिता की झोपड़ी पर पहुंचे ओमप्रकाश ने पिता, सौतेली मां कमला देवी एवं बहन रीता जोशी तथा अपनी बड़ी बेटी श्रेया जोशी से मुलाकात के बाद अपनी झोपड़ी की तरफ चला गया। करीब एक घंटे बाद मां कमला जोशी जब बेटे की झोपड़ी में पहुंची तो उसकी पैरों तले जमीन खिसक गई। बहू संध्या (25) का शव नॉयलान की रस्सी के फंदे से झूल रहा था। जबकि एक साल की पोती साक्षी का शव नीचे जमीन पर पड़ा था, जबकि उसका बेटा वहां नहीं था। घटनास्थल पर दही का पैकेट भी मिला है।
महिला की चीख पुकार सुनकर परिजन झोपड़ी से भागकर आए। इस बीच सूचना पर एसएसपी कृष्ण कुमार वीके, एसपी सिटी ममता वोहरा, सीओ कनखल जयदेव आर्य, एसओ कनखल अनुज सिंह, चौकी प्रभारी डीपी काला मौके पर पहुंचे। एसएसपी के मुताबिक घटनास्थल से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पहले महिला ने अपनी बेटी की फांसी लगाकर हत्या की है और फिर वह खुद फांसी के फंदे पर झूल गई। हालांकि घटना की वास्तविक जानकारी ओमप्रकाश के मिलने के बाद ही पता चल सकेगी।


कई वर्ष पहले यहां बसा था नेपाली परिवार
हरिद्वार। नेपाली मूल का ये परिवार कई वर्षों से हरिद्वार में है। बुजुर्ग मानदेव जोशी ने दो शादी की थी। पहली पत्नी से उसका एक बेटा ओमप्रकाश है, जबकि दूसरी पत्नी कमला से एक बेटा और एक बेटी है। कमला नेपाल में ही अपने बच्चों के साथ रहती है, लेकिन आजकल यहां आई हुई थी। बाग में लगने वाले आम को भी ये ही परिवार बेचता है। घटनास्थल (झोपड़ी के सामने) के समीप बुजुर्ग पिता गुमसुम साथ बैठा था। पत्नी बदहवास यहां वहां दौड़ रही थी। बस, पत्नी से ही वो बात कर रहा था।


बच गई बड़ी बेटी की जान
हरिद्वार। अगर ये कहा जाए कि श्रेया की जान बच गई तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। श्रेया रात को अपनी दादी के पास झोपड़ी में सोने चली गई थी। हालांकि, रात को उसने अपनी झोपड़ी के दो चक्कर मारे थे। पर उसे अपनी बुआ और दादी के साथ रहना पसंद था। इसलिए, वह लौटकर अपनी झोपड़ी में नहीं आई थी। सुबह मां स्कूल भेजने के लिए उसे लेने नहीं आई, इसलिए वह स्कूल नहीं जा सकी थी। माना जा रहा है कि अगर वह भी झोपड़ी में होती तब शायद उसकी जान को भी खतरा होता।
विज्ञापन



मिलनसार थी संध्या
हरिद्वार। संदिग्ध परिस्थितियों में मृत संध्या का स्वभाव मिलनसार था। वह आसपास के घरों मेें चौका-बर्तन का काम करती थीं। मां-बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से हर कोई स्तब्ध है। मौके पर पहुंचे हर कालोनीवासी की जुबां पर संध्या के मिलनसार स्वभाव के होने की ही बात थी। वह कभी भी अपने पति को लेकर कोई गिला शिकवा नहीं करती थी। सास कमला जोशी ने स्वीकारा कि बेटे- बहू के बीच नोकझोंक होती थी, लेकिन कभी बहू ने उनसे शिकवा-शिकायत नहीं की।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें