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अमावस्या पर नहाए पर्व

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अमर उजाला ब्यूरो
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हरिद्वार।
आषाढ़ अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में स्नान कर पुण्य अर्जित किया। रात ही लाखों श्रद्धालु गंगा नहाने पहुंच गए थे। शनिवार के दिन अमावस्या पड़ने से शनिश्चरी हुई अमावस्या के स्नान का महत्व और अधिक बढ़ गया था। नारायणी शिला और कुशावर्त पर पितृ कर्म करने के लिए भी भारी भीड़ उमड़ी।
शनिवार के दिन जब भी अमावस्या पड़ी है, तभी धर्मनगरी में अप्रत्याशित भीड़ होती आई है। मान्यता है कि शनिश्चरी अमावस्या पर पितृ निमित्त श्राद्ध कर्म करने से पितृ दोषों से मुक्ति हो जाती है। लाखों श्रद्धालुओं ने दो दिनों में कुशावर्त और नारायणी शिला पर पितृ श्राद्ध कराए। नारायणी शिला पर तड़के तीन बजे से ही तिल रखने की जगह शेष नहीं बची थी। अनेक श्रद्धालुओं ने गणेश घाट पर पितृ कर्म संपन्न कराए। अमावस्या नहाने के लिए राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे थे।
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श्रद्धालुओं ने धर्मनगरी के अनेक निर्जन शिव मंदिरों में जाकर भी पितृ तर्पण किया। कुशावर्त के दत्तात्रेय शिव मंदिर में भारी भीड़ लगी रही। हर की पैड़ी पर प्रात:कालीन और सांयकालीन आरती के दर्शन करने के लिए हजारों तीर्थयात्री मौजूद थे।
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प्रारंभ हुए गुप्त नवरात्र, घर-घर साधना
तंत्र पूजा के लिए मशहूर गुप्त नवरात्र आषाढ़ अमावस्या के दिन ही प्रतिपदा लग जाने से प्रारंभ हो गए। इन नवरात्रों में तंत्र और अघोर साधना विशेष रूप से की जाती है। गुप्त नवरात्रों की पूजा बताकर नहीं की जाती और प्राय: सवेरे के अंधेरे में घरों पर होती है। इसके अलावा अनेक श्रद्धालु चंडी और मनसा वन के निर्जन क्षेत्रों में जाकर नौ दिवसीय साधना में जुट गए हैं। कनखल के तारा देवी, बगुला मुखी, काली मंदिरों में विशेष पूजा प्रारंभ हुई। शीतला माता के मंदिरों में भी भगवती आराधना की गई। शिवालिक वन क्षेत्र स्थित मां सुरेश्वरी देवी के मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। इसी के साथ अनेक भक्तों ने मनसा देवी, चंडी देवी, दक्षिण काली और माया देवी जाकर भगवती के दर्शन किए।
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