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कैबिनेट के तोहफे से हजारों कर्मियों की बल्ले-बल्ले

Sat, 09 Nov 2013 09:29 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर उत्तराखंड सरकार ने 18 हजार संविदा, तदर्थ और दैनिक कर्मचारियों को नियमित करने का तोहफा दिया है।
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इसके साथ ही विभिन्न विभागों के रिक्त पदों पर अस्थायी नियुक्ति पर रोक लगाते हुए अब करीब तीस हजार पदों पर सीधी भर्ती करने का फैसला किया है।

रोजगार से संबंधित बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने शुक्रवार को कैबिनेट बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में रोजगार से संबंधित बड़ा फैसला लिया गया है। अब तक जिस विभाग में भी तदर्थ, संविदा और दैनिक वेतनभोगी काम कर रहे हैं उन्हें नियमित किया जाएगा।

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शर्त यह होगी कि ये कर्मी पात्रता पूरी करते हो। नियमित वही होंगे जो पद के सापेक्ष काम कर रहे हैं। उनको नियमित करने वाली नियमावली अगली कैबिनेट में रखी जाएगी।
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अस्थायी नियुक्तियों पर रोक
मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न महकमों में जो भी पद रिक्त हैं उन्हें सीधी भर्ती से भरा जाएगा। अब किसी भी महकमे में अस्थायी नियुक्तियों पर भी रोक लगा दी गई है।

कोई विभागाध्यक्ष या अन्य अफसर तदर्थ, संविदा और दैनिक वेतनभोगी के पद पर नई नियुक्ति करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि चतुर्थ श्रेणी के पदों पर आउटसोर्सिंग से ही भर्ती होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट के इस फैसले से हजारों युवाओं को फायदा होगा और यह भर्ती अभियान राज्य स्थापना दिवस के बाद शुरू होगा।

इन कर्मियों को नहीं मिलेगा लाभ
संविदा कर्मियों को नियमित करने के सरकार के फैसले का लाभ मनरेगा, एनआरएचएम जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में तैनात संविदा कर्मियों को नहीं मिलेगा। राजकीय विभागों में रिक्त पदों के सापेक्ष रखे गए संविदा कर्मी ही नियमितिकरण के दायरे में आएंगे।

राज्य में लगभग चार हजार ऐसे कर्मचारी हैं जो विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों के तहत तैनात हैं। अकेले एनआरएचएम में 1500 कर्मचारी संविदा पर तैनात हैं। वहीं उपनल सहित अन्य आउटसोर्सिंग एजेंसी से जिनकी संविदा पर भर्ती हुई है उन्हें नियमित होने की शर्तें पूरी करने पर लाभ मिलेगा।

अन्य फैसले
135 वीडीओ को एकमुश्त 10-10 हजार रुपए
ग्राम्य विकास विभाग में भर्ती किए गए 135 ग्राम विकास अधिकारियों को एकमुश्त 10-10 हजार रुपए मिलेंगे। इन अधिकारियों की नियुक्ति के तत्काल बाद ट्रेनिंग पर भेजे जाने के बजाय दैवी आपदा में तैनात किया गया था। उस दौरान इनका वेतन भी नहीं बना था, इसलिए उन्हें एकमुश्त 10 हजार रुपए दिए जाएंगे।

कॉन्ट्रैक्ट लेबर के लिए सभी शुल्कों में बढ़ोत्तरी
कैबिनेट ने श्रम विभाग के उस प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी है, जिसके तहत कारखानों में कॉन्ट्रैक्ट लेबर रखने के लिए फैक्टरी और कॉन्ट्रैक्टर के रजिस्ट्रेशन, सिक्योरिटी व लाइसेंस फीस में अलग-अलग श्रेणियों में पांच से 15 गुना तक बढ़ोत्तरी की मांग की गई थी। 1972 के बाद पहली बार यह शुल्क बढ़ाया गया है।

प्रदेश में आंदोलनों की आंधी
जिस उत्तराखंड का जन्म एक बड़े आंदोलन से हुआ आज उसी राज्य में आंदोलनों की आंधी आ गई है। हाल ही में राज्य कर्मचारी 21 दिन तक हड़ताल पर डटे रहे, उनको राज्य सरकार ने जब मनाया तो कई अन्य बड़े संगठन आंदोलन का झंडा लेकर खड़े हो गए।
इस समय राज्य में मिनिस्ट्रियल कर्मचारी, शिक्षा आचार्य,  जल निगम कर्मी इत्यादि आंदोलन कर रहे हैं।

इनमें कई पहले भी कार्य बहिष्कार और हड़ताल के जरिये अपनी ताकत दिखा चुके हैं अब फिर उन्होंने मांगों के समर्थन में हड़ताल करने की धमकी दी है। वहीं आपदा की न्यायिक जांच कराने सहित अन्य मांगों पर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू कर दी है।

जबकि उत्तराखंड राज्य निर्माण चिह्नित आंदोलनकारी मंच क्रमिक अनशन पर डटा हुआ है। उन्होंने शनिवार तक मांग पूरी नहीं होने पर आत्मदाह की चेतावनी दी है।

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को 13 दिन का अवकाश
राज्य कैबिनेट की बैठक में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए भी एक साल में 13 अवकाश स्वीकृत कर दिए गए। कैबिनेट के इस फैसले का फायदा प्रदेश की लगभग 10 हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को मिलेगा। उल्लेखनीय है कि अब तक इन्हें कोई अवकाश नहीं मिलता था।

कैबिनेट के इस फैसले पर आंगनबाड़ी कार्यकत्री संगठन की प्रदेश अध्यक्ष रेखा नेगी, जिलाध्यक्ष ज्योतिका पांडे और प्रांतीय महामंत्री सुशीला खत्री ने खुशी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन अवकाश दिया जाना चाहिए। इसके लिए भी केंद्र सरकार से मांग की जाएगी।
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कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की अन्य मांगों (15 हजार रुपये मासिक वेतन, सुपरवाइजरों के पद के लिए आयु सीमा न हो और राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए) आदि पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

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