हालात को देखते हुए कुछ मदरसों के खातों में डालने के बजाए पैसा सीधे उन्हें दिए जाने की मांग का मामला भी सामने आया है। उनका कहना है कि वह स्वयं इस पैसे को बच्चों को बांट देंगे।
छह माह में बंद हो जाता है खाता
बैंकों के नए नियमानुसार छह माह तक खाते में कोई ट्रांजेक्शन न होने पर खाता बंद कर दिया जाता है, डीबीटी योजना के अंतर्गत बच्चों के खाते में साल में एक ही बार पैसा डाला जाता है। यही वजह है कि जिन बच्चों के खाते खुलते हैं, अगले साल तक उनमें से अधिकांश के बंद हो जाते हैं।
जनपद में करीब 20 प्रतिशत छात्रों के बैंक खाते नहीं खुलने से उन्हें पुस्तकों का लाभ नहीं मिला है। जल्द सभी के खाते खुलवा लिए जाएंगे।
- डा. रुपेंद्र दत्त शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी