डेंगू से पीड़ित तीन सिपाहियों की हालात गंभीर बताई जा रही है। दो सिपाही हरिद्वार और एक का देहरादून के अस्पताल में उपचार चल रहा है। तीनों सिपाहियों की हालत गंभीर होने पर उन्हें प्लेटलेट्स चढ़ाई गई हैं। सिविल लाइंस कोतवाली से कई सिपाही और दरोगा ने हरिद्वार, देहरादून पहुंचकर खून दिया है। बताया जा रहा है कि प्लेटलेट्स चढ़ने के बाद एक सिपाही की हालत में कुछ सुधार है।
परिवार पर भी डेंगू का कहर
जिन सिपाहियों को डेंगू हुआ है, उनके परिवार के कुछ सदस्यों को भी डेंगू हो गया। बताया जा रहा है कि सिविल लाइंस कोतवाली में तीन से चार सिपाहियों की पत्नियों को डेंगू की पुष्टि हुई है। इनका भी उपचार देहरादून और हरिद्वार में चल रहा है। डेंगू होने के बाद कोतवाली व थानों में साफ सफाई और दवाइयों का छिड़काव किया जा रहा है।
थानों और कोतवाली में गंदगी की भरमार
जिले के थानों और कोतवाली में साफ सफाई की व्यवस्था सही तरीके से नहीं होती है। इतना ही नहीं कोतवाली परिसरों में ही लावारिस और अन्य टू व्हीलर वाहन खड़े रहते हैं। कई जगहों पर टायर और अन्य सामान पड़ा रहता है, जिनमें पानी भरा रहता है। इस पानी में डेंगू के मच्छर पैदा होते हैं। इन मच्छरों के काटने से भी डेंगू फैलता है।
फिलहाल रुड़की और मंगलौर क्षेत्र में पुलिसकर्मियों को डेंगू होने की कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो मामले की जांच कराई जाएगी। इन सिपाहियों की रिपोर्ट देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- गुरनाम सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी, हरिद्वार
रुड़की और मंगलौर क्षेत्र में तैनात 30 सिपाहियों को डेंगू हुआ है। इन सिपाहियों को हरिद्वार और देहरादून के अलग-अलग अस्पताल में उपचार चल रहा है। उपचार और आराम के लिए सिपाहियों की छुट्टियां की जा रही हैं।
- नवनीत सिंह, एसपी देहात
मौसम में ठंड के घुलने के साथ ही डेंगू का प्रकोप भी कम होने लगा है। डॉक्टरों के अनुसार तापमान में गिरावट के चलते अब डेंगू मच्छर का लार्वा और वायरस धीरे-धीरे निष्क्रिय हो रहा है। दून अस्पताल में बुधवार को 52 मरीजों के रक्त की एलाइजा जांच की गई। इसमें से 11 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है।
बता दें, जिले में बीते करीब चार महीने से डेंगू बुखार ने कहर मचा रखा है। सरकारी आंकड़ों पर विश्वास करें तो इस सीजन में अब तक जिले में छह लोगों की डेंगू बुखार से मौत हो चुकी है और 4811 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। हालांकि डेंगू से मौतों और इससे पीड़ित मरीजों का असल आंकड़ा कई ज्यादा बताया जा रहा है।
अब बीते कुछ दिन से तापमान में गिरावट के साथ ही डेंगू के मरीज कम होने से स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली है। बुधवार को दून अस्पताल में 52 मरीजों के रक्त सैंपल की एलाइजा जांच की गई। इसमें से 11 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई।
राजकीय गांधी शताब्दी अस्पताल के सीनियर फिजीशियन डॉ. प्रवीण पंवार ने बताया कि तापमान 15 डिग्री से कम होने पर डेंगू मच्छर का लार्वा और उसका वायरस निष्क्रिय होने लगता है। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण अधिकारी सुभाष जोशी ने बताया कि जिले के विभिन्न अस्पतालों में अब डेंगू के मरीज बहुत कम आ रहे हैं। उन्होंने अपील की है कि फिर लोग इसे लेकर एहतियात जरूर बरतें।
हरिद्वार के मरीजोें के एलाइजा टेस्ट की रिपोर्ट के अनुसार 99 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इस रिपोर्ट के आने के बाद अब डेंगू के मरीजों की संख्या 557 तक पहुंच गई है। जबकि संदिग्ध मरीजों की संख्या 1280 तक पहुंच गई है। डेंगू से पीड़ित मरीजों के मामले लगातार सामने आने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। जबकि अस्पतालों के हालात यह है कि मरीज भर्ती करने के लिए बिस्तर तक नहीं है।
डेंगू के मरीजों के हरिद्वार के साथ-साथ देहरादून के अस्पतालों में भारी संख्या में इलाज कराया है। इसमें देहरादून के सीएमओ ने अक्तूबर में भर्ती हुए डेंगू के 99 मरीजों की रिपोर्ट भेजी है। इस रिपोर्ट के मिलने के बाद एलायजा रिपोर्ट के अनुसार हरिद्वार जनपद में 557 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है, जबकि संदिग्ध मरीजों की संख्या 1280 तक पहुंच गई है।
डेंगू के मरीजों के मामले लगातार आने पर अस्पतालों में भर्ती करने के लिए बेड खाली नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब अभियान भी बंद हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अब डेंगू को नियंत्रण में होने की बात कह रहे हैं। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. गुरनाम सिंह ने बताया कि डेंगू के नए मरीज कम आ रहे हैं, बल्कि पुराने मरीजों के ही मामले हैं। दीपावली के बाद से डेंगू का लार्वा बामुश्किल ही पनपेगा।
रुद्रपुर में तैनात सीपीयू के दो दरोगा भी डेंगू की चपेट में आ गए हैं। दोनों का शहर के निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। पुलिस के मुताबिक, सीपीयू के दरोगा प्रकाश चंद्र और सतपाल पटवाल को डेंगू की शिकायत थी। दोनों का निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है। मालूम हो कि इससे पूर्व रुद्रपुर कोतवाली के एक दरोगा समेत 16 पुलिस कर्मी भी डेंगू की चपेट में आए थे।
स्वास्थ्य विभाग के शिविर में ग्रामीणों का हंगामा
वहीं हरिद्वार जिले के नारसन कलां गांव स्थित आर्य समाज मंदिर में नारसन सीएचसी की ओर से लगाए गए शिविर में डेंगू किट आदि न होने को लेकर ग्रामीणों ने काटा हंगामा। नारसन क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों में बुखार कहर बरपा रहा है। मोहम्मदपुर जट्ट, बूढ़पुर जट्ट, ब्रह्मपुर जट्ट, खेड़ाजट्ट, उल्हेड़ा, नंगला कोयल, नारसन कलां, कुवाहेड़ी और टिकोला कलां गांव में सैकड़ों ग्रामीण बुखार की चपेट में हैं।
भाकियू गढ़वाल मंडल के महामंत्री अरविंद राठी का कहना है कि शिविर के नाम पर लोगों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ग्रामीण उपेंद्र कुमार, तेजपाल, गुरु दत्त त्यागी, सौरभ, मनोज, अमरेश, सरोज, संजो, राजू व तेजवीर आदि ने बताया कि गांव में संदिग्ध बुखार कहर बरपा रहा है।
स्वस्थ विभाग की ओर से गांव में किसी दवा का छिड़काव नहीं किया गया है। इसके चलते बुखार बढ़ता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर नारसन सीएचसी के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विवेक गर्ग का कहना है कि शिविर के दौरान डेंगू की जांच के लिए जो किट आनी थी, उसे आने में थोड़ी देर हो गई, जिससे लोग भड़क गए थे।