ब्लॉक क्षेत्र के कई गांवों में शुक्रवार को दोपहर बाद तेज हवा और बारिश के साथ ओलावृष्टि शुरू हो गई। करीब 30 मिनट तक ओलाव़ृष्टि जारी रही। इससे किसानों और बागवानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय किसानों और बागवानों को अब बैंक का ऋण न चुका पाने का डर सता रहा है। किसानों ने तहसील प्रशासन से नुकसान का आंकलन कर मुआवजा देने की मांग की है। चकराता में अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
चकराता क्षेत्र के सैंज, कुनैन, अमराड़, झबराड़, करोड़ा, कुताड़ आदि गांवों में शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे अचानक से आसमान में काले बादल छा गए। तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि शुरू हो गई। इससे आडू, खुमानी, पुलम, चुल्लू, सेब, नाशपती, अखरोट, मटर, बींस, गोभी, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, लहसुन, प्याज आदि फलों और सब्जियों को नुकसान पहुंचा है।
ब्लॉक प्रमुख निधि राणा, ग्रामीण महिपाल सिंह राणा, सदर स्याणा पूरण सिंह राणा, ब्रह्मदत्त, राजेंद्र सिंह, नरेंद्र राणा आदि ने बताया कि इस बार बगीचों में बहुत कम फल लगे हैं। बताया कि ओलावृष्टि उसे भी नष्ट कर दिया है। ओलावृष्टि से नकदी फसलें भी बर्बाद हो गईं। किसान, बीज, खाद, दवाई के लिए बैंक से कर्ज लेता है। जब फसल तैयार हो जाती है तो उसके बेचकर कर्ज चुकाता है। कहा कि फसल को हुए नुकसान से किसान अब मुसीबत में फंस गया है। उन्होंने तहसील प्रशासन से नुकसान का आंकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।
चकराता के तहसीलदार मनोहर लाल अंजुवाल ने बताया कि राजस्व उपनिरीक्षक को ओलावृष्टि से हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए निर्देशित कर दिया गया है। रिपोर्ट आने पर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।