कहां है सरकार, नियम हो रहे तार-तार
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
देहरादून। सरकार खामोश है, अफसर नींद में हैं। लिंगदोह समिति की सिफारिशें और राज्य सरकार के नए नियमों का पुलिंदा कागजों में दफन है। इसके अलावा नामांकन खत्म होने के बाद पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए। ऐसे मेें नामांकन के दौरान जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। प्रिंटेड प्रचार सामग्री खूब हवा में उछाली गई। कॉलेज परिसर से बाहर जमकर जुलूस निकालकर शक्ति प्रदर्शन किए गए।
एसजीआरआर : सड़क पर जुलूस
एसजीआरआर पीजी कॉलेज में प्रत्याशियों ने हर साल की तरह इस साल भी सड़क पर ही जुलूस निकाला। कॉलेज से बाहर करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित पथरीबाग चौक से जुलूस निकाले गए। इस दौरान हवा में जमकर प्रिंटेड प्रचार सामग्री उछाली गई। जुलूस निपटने के बाद कॉलेज के बाहर की सड़क पर प्रचार सामग्री की गंदी नजर आई। इस दौरान प्रत्याशियों ने जमकर आतिशबाजी भी की। कॉलेज के मुख्य चुनाव अधिकारी मेजर प्रदीप सिंह ने कहा कि सरकार ने इसके लिए पर्यवेक्षक की तैनाती की है जो कि अभी तक नहीं पहुंचे हैं। उनका काम कॉलेज परिसर के भीतर की व्यवस्था देखने की है।
डीबीएस : गेट से लेकर बाहर तक प्रचार सामग्री
नामांकन के उत्साह के बीच कॉलेज परिसर में खूब प्रिंटेड प्रचार सामग्री बिखरी नजर आई। छात्र संगठनों ने खूब हो-हल्ले के साथ ही जमकर लिंगदोह की सिफारिशों की धज्जियां उड़ाईं। कई प्रत्याशियों ने तो केवल नामांकन में ही हजारों रुपये खर्च कर दिए हैं। हालांकि पूरा चुनाव खर्च 25 हजार में निर्धारित हैं, लेकिन प्रचार सामग्री के ढेर कुछ और ही गवाही दे रहे हैं। कॉलेज के आसपास की दीवारों पर भी खूब प्रचार सामग्री चिपकाई गई है।
डीएवी : प्रिंटेड फ्लैक्स से पटा कॉलेज
डीएवी पीजी कॉलेज में मंगलवार को नामांकन के दौरान सरकार और लिंगदोह के नियमों की धज्जियां जमकर उड़ती नजर आईं। प्रत्याशियों ने एक ओर जहां प्रिंटेड सामग्री और दूसरे महंगे आइटम लेकर जुलूस निकाले तो दूसरी ओर कॉलेज की दीवारें फ्लैक्स से भर दी गई हैं। नियमों से इतर सभी प्रत्याशियों महंगे-महंगे फ्लैक्स कॉलेज की दीवारों पर लटकाए हैं। कुछ प्रत्याशियों ने तो अपने कटआउट भी लगाए हैं।
ये हैं नियम
-कोई भी प्रत्याशी कॉलेज परिसर से बाहर जुलूस नहीं निकाल सकता है।
-कोई भी प्रत्याशी प्रिंटेड सामग्री का इस्तेमाल नहीं करेगा। बड़ा फ्लैक्स भी हाथ से बनाना होगा।
-10 हजार से कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों में अधिकतम 25 हजार और इससे अधिक छात्रसंख्या वाले कॉलेज में अधिकतम 50 हजार खर्च की सीमा होगी।
-कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव के नामांकन से लेकर पूरी प्रक्रिया बाहरी सरकारी अधिकारी की निगरानी में होगी।
-कॉलेज से बाहर कहीं भी प्रचार सामग्री नहीं चिपका सकते हैं।
नामांकन खत्म होने के बाद बने पर्यवेक्षक
नियमों के हिसाब से सभी कॉलेजों में नामांकन से लेकर चुनाव और मतगणना तक पर्यवेक्षक नियुक्त रहने हैं, लेकिन राजधानी के तीन कॉलेजों में नामांकन पूरे होने के बाद जिलाधिकारी ने पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। नामांकन खत्म होने तक कोई भी पर्यवेक्षक मंगलवार को किसी कॉलेज में नहीं पहुंचा था। कॉलेज प्रशासन भी दिनभर पर्यवेक्षकों का इंतजार करते रहे। ऐसे में नामांकन में नियमों का अनुपालन हुआ या नहीं, इसका कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं बन पाया।