खानपुर। गंगा नदी का बढ़ता जलस्तर एक बार फिर से क्षेत्रीय ग्रामीणों की धड़कन बढ़ाने लगा है, पिछले दिनों खतरे के निशान पर पहुंचे जल स्तर के कारण एक जगह पर तटबंध ध्वस्त हो गया था। लेकिन इसके बाद जल स्तर घटने लगा। वहीं रविवार को एक बार फिर गंगा का पानी चेतावनी स्तर पर पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों की धड़कने बढ़ गई है। वहीं दूसरी ओर करीब साढ़े छह सौ हेक्टेयर कृषि भूमि पर अभी भी बाढ़ का पानी भरा हुआहै।
विगततेरह अगस्त को झमाझम बारिश हुई थी। जिसके चलते गंगा, सोलानी और बाणगंगानदियों का जलस्तर बढ़ गया था। जलस्तर बढ़ने से गंगा नदी के किनारे बने तंटबध में कलसिया गांव के सामने चौदह अगस्त को कटाव शुरू हो गया था। तहसील प्रशासन सिंचाई विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को लेकर तटबंध की मरम्मत कार्य में जुटा था। लेकिन गंगा नदी में बढ़ रहे जलस्तर के चलते सिंचाई विभाग मरम्मत नहीं कर सका था। चौदह अगस्त शाम तक ही तंटबध ध्वस्त हो गया था। तटबंध ध्वस्त होने से जहां उत्तर प्रदेश के रामसहायवाला और हिम्मतपुर बेला गांव का लक्सर और बिजनौर से पूरी तरह संपर्क कट गया था। वहीं बाढ़ का पानी आधा दर्जन गांव की साढ़े छह सौ हेक्टेयर कृषि भूमि परखड़ी फसलों में फैल गया था। इसके साथ ही तटबंध में रोजाना कटाव हो रहाहै। इसी बीच रविवार को फिर से गंगा नदी का जलस्तर एकाएक बढ़कर चेतावनी निशान (293) के करीब 292.90 मीटर तक पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ते से क्षेत्र के कलसिया, बालावाली, डुमनपुरी, बादशाहपुर, इदरीशपुर, शेरपुरबेला व उत्तर प्रदेश के रामसहायवाला और हिम्मतपुर बेला गांव के ग्रामीणों की धड़कन बढ़ने लगी है। क्योंकि गंगा नदी के किनारे ध्वस्त हुये तटबंध सेक्षेत्र मे घुसा बाढ़ का पानी इन गांव की कृषि भूमि पर पहले से ही फैला हुआ है। अगर ऐसे में गंगा नदी का जलस्तर थोड़ा भी बढ़ा तो ध्वस्त हुए तटबंध से बाढ़ का पानी क्षेत्र में घुसकर कृषि भूमि पर खड़ी फसलों के साथ-साथ आबादी में भी तबाही मचा सकता है।