पहाड़ पर सेवा न दी तो एक करोड़ जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। प्रदेश में कम फीस पर एमबीबीएस करने वालों छात्रों को नौ पहाड़ी जिलों (दुर्गम) में पांच साल तक सेवा देनी अनिवार्य होगी। इसके लिए उसे प्रवेश के समय ही बांड भरना होगा। बांड की शर्तों का उल्लंघन करने पर ऐसे डॉक्टरों को एक करोड़ रुपये जुर्माना देना होगा।
एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी ने सोमवार से एमबीबीएस और बीडीएस दाखिलों के लिए नीट यूजी काउंसिलिंग का पहला चरण शुरू कर दिया। इसके तहत सरकारी कॉलेजों में छात्रों को बांड भरकर महज 50 हजार रुपये सालाना फीस में एमबीबीएस की पढ़ाई करने का मौका दिया जा रहा है। यूनिवर्सिटी ने बांड का प्रारूप भी जारी कर दिया है। सीट आवंटन के बाद एडमिशन के समय छात्रों को यह बांड भरकर जमा कराना होगा। बांड की शर्तें पहाड़ में चिकित्सकों की कमी के मद्देनजर सरकार ने तैयार की हैं। इसके तहत एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र को पांच साल तक नौ पहाड़ी जिलों के कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में सेवा देनी होगी। इस अवधि में उन्हें सुगम जिले की श्रेणी में आने वाले देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में नौकरी का मौका नहीं मिलेगा।
अगर एमबीबीएस के बाद सीधे एमडी में दाखिला लेना है, तो स्वास्थ्य महानिदेशक की अनुमति जरूरी है। अगर बिना अनुमति एमडी या एमएस में एडमिशन लिया तो सीधे तौर पर बांड की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा। एमबीबीएस के बाद अगर एमडी की अनुमति मिलती है, तो यह डिग्री करने के बाद छात्र को पांच साल पहाड़ी क्षेत्र में सेवा देनी अनिवार्य होगी। अगर छात्र पांच साल की सेवा देने में आनाकानी करता है या संबंधित जगह पर ज्वाइन नहीं करता है, तो उस पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगेगा। बांड की शर्तों के मुताबिक अगर 10 दिन से ऊपर ड्यूटी से अनुपस्थित रहे तो वेतन काट लिया जाएगा। पांच साल की यह पहाड़ सेवा कांट्रेक्ट आधारित होगी। काउंसिलिंग के पहले ही दिन सोमवार देर शाम तक 100 से अधिक छात्र अपना पंजीकरण करा चुके थे। इनमें से कई ने शुल्क भी जमा करा दिया था।
बांड वाले डॉक्टरों की केवल इन जिलों में ड्यूटी
टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, उत्तरकाशी, चंपावत, बागेश्वर, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा।
यहां मिलेगी काउंसिलिंग की पूरी जानकारी : www.hnbumuexams.com/UKNEETUG18/Default.aspx